Bhagat Singh Slogans In Hindi (116+ भगत सिंह के नारे)


Bhagat Singh Slogans In Hindi (116+ भगत सिंह के नारे) भगत सिंह भारत के सबसे महान स्वतंत्रता संग्राम शहीद सेनानियों में से एक थे। वे एकमात्र ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने बेहद कम उम्र में देश को स्वतंत्र कराने में अपना विशेष योगदान दिया। परंतु अंग्रेजों द्वारा इन्हें इनकी छोटी सी उम्र में ही फांसी की सजा सुनाकर लटका दिया गया।

क्रांति की तलवार तो सिर्फ विचारों की शान से तेज होती है।

 मैं उस सर्वशक्तिमान सर्वोच्च ईश्वर के अस्तित्व से इनकार करता हूं।

इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से।

जिस कारण भगत सिंह 23 साल की उम्र में अपने देश के लिए शहीद हो गए। जब भारत की आजादी के लिए प्रत्येक क्षेत्र में लोग अंग्रेजो के खिलाफ लड़ रहे थे, वही भगत सिंह प्रत्येक नौजवानों के लिए यूथ आईकॉन थे जो देश के प्रत्येक नौजवान को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। चलिए Bhagat Singh Slogans in Hindi के बारे में जानते है। 

इनका सपना अपने देश को आजाद देखना था, भगत सिंह ने अपनी आखिरी सांस तक अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठाई, भले वे अपने देश को आजाद नहीं देख सके। लेकिन अपने महान कर्मों से ये आज लाखों लोगों के लिए एक आदर्श व्यक्ति है। भले ही भगत सिंह का जीवन काल अत्यन्त छोटा था परंतु इन कम दिनों में भी उन्होंने देश के लिए बड़े कार्यों को अंजाम दिया और लोगों को, देश को अंग्रेजों के हवाले से छुड़ाने के लिए विभिन्न दलों की शुरुआत की।


Bhagat Singh Slogans In Hindi (116+ भगत सिंह के नारे)

Bhagat Singh Slogans in Hindi (भगत सिंह पर स्लोगन)

भगत सिंह एक सिक्ख परिवार में जन्मे थे इन्होंने बचपन से ही साधारण जनता पर अंग्रेजों द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों को देखा था। इन बुरे अत्याचारों को देखकर उनके मन में छोटी उम्र से ही अंग्रेजों को देश से भगाने का विचार जागृत हो चुका था।

उनका मानना था देश के नौजवान मिलकर अंग्रेजों को इस देश से भगा सकते हैं, इसलिए उन्होंने खुद के साथ नौजवानों को भी आजादी दिलाने के लिए अग्रसर किया। देशभक्ति के कारण उन्हें मजबूर होना पड़ा जिस कारण आज भी प्रत्येक व्यक्ति उनके जीवन से प्रेरणा लेता है। Bhagat Singh Slogans in Hindi पर हमने जो Bhagat Singh स्लोगन लिखा है वह है – 

कोई भी व्यक्ति, जो जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार खड़ा हो। उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा और चुनौती भी देना होगा।

महान आवश्यकता के समय, हिंसा अनिवार्य हैं।

प्रेमी, पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं।

 व्यक्तियों को कुचल कर, वे विचारों को नहीं मार सकते।

क्रांति की तलवार तो सिर्फ विचारों की शान से तेज होती है।

 मैं उस सर्वशक्तिमान सर्वोच्च ईश्वर के अस्तित्व से इनकार करता हूं।

इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से।

अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूँ तो इंक़लाब लिख जाता है।

स्वतंत्रता हर इंसान का कभी न ख़त्म होने वाला जन्म सिद्ध अधिकार है।

अपने दुश्मन से बहस करने के लिये उसका अभ्यास करना बहुत जरुरी है।

निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार, ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम् लक्षण हैं।

प्यार हमेशा आदमी के चरित्र को ऊपर उठाता है, यह कभी उसे कम नहीं करता है।

मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है।

ज़रूरी नहीं है कि क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो। यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं है।

राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है। मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आजाद है।

क़ानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है जब तक की वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करे।

दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उलफत।

मेरी मिट्‌टी से भी खुशबू-ए वतन आएगी।

क्या तुम्हें पता है कि दुनिया में सबसे बड़ा पाप गरीब होना है। गरीबी एक अभिशाप है, यह एक सजा है।

मुझे खुद को बचाने की कभी कोई इच्छा नहीं रही और मैंने कभी भी इसके बारे में गंभीरता से नहीं सोचा।

सर्वगत भाईचारा तभी हासिल हो सकता है जब समानताएं हों – सामाजिक, राजनैतिक एवं व्यक्तिगत समानताएं।

वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन वे मेरे विचारों को नहीं मार सकते। वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, मेरी आत्मा को नहीं।

अगर धर्म को अलग कर दिया जाए तो राजनीति पर हम सब इकट्ठे हो सकते हैं। धर्मों में हम चाहे अलग अलग ही रहें।

मैं खुशी से फांसी पर चढ़ूंगा और दुनिया को दिखाऊंगा कि कैसे क्रांतिकारी देशभक्ति के लिए खुद को बलिदान दे सकते हैं।

मेरा जीवन एक महान लक्ष्य के प्रति समर्पित है – देश की आज़ादी। दुनिया की अन्य कोई आकर्षक वस्तु मुझे लुभा नहीं सकती।


बुराई इसलिए नहीं बढ़ रही है कि बुरे लोग बढ़ गए हैं, बल्कि बुराई इसलिए बढ़ रही है क्योंकि बुराई सहन करने वाले लोग बढ़ गये हैं।

लिख रह हूँ मैं अंजाम जिसका कल आगाज़ आएगा।

मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा।

इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे।

यह शादी करने का समय नहीं है। मेरा देश मुझे बुला रहा है। मैंने अपने दिल और आत्मा के साथ देश की सेवा करने के लिए एक प्रतिज्ञा ली है।

राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आज़ाद है।

ज़रूरी नहीं था की क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो, यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था।

बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते, क्रान्ति की तलवार विचारों के धार बढ़ाने वाले पत्थर पर रगड़ी जाती है।

क्रांति मानव जाति का एक अपरिहार्य अधिकार है।

स्वतंत्रता सभी का एक कभी न ख़त्म होने वाला जन्म-सिद्ध अधिकार है।

श्रम समाज का वास्तविक निर्वाहक है।

व्यक्तियो को कुचल कर, वे विचारों को नहीं मार सकते।

निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण हैं।


मैं एक मानव हूं और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है।

प्रेमी, पागल, और कवी एक ही चीज से बने होते 1हैं।

भगत सिंह का आरंभिक जीवन

भगत सिंह का जन्म एक साधारण से सिक्ख परिवार में हुआ था और इनके जन्म के वक्त इनके पिता किशन सिंह जी जेल में थे। भगत सिंह के मन में बचपन से ही देश के प्रति गहरा प्रेम था।

क्योंकि इनके चाचा जी ,पिताजी सब अंग्रेजो के खिलाफ थे भगत सिंह बचपन से ही अपने घर वालों में इस देशभक्ति की भावना देखकर स्वयं देश के प्रति अत्यधिक श्रद्धा रखते थे।

इनके चाचा जी भी बहुत बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने भारतीय देशभक्ति एसोसिएशन सभा भी बनाई थी, भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह पर लगभग 22 केस दर्ज थे।

जिस कारण उन्हें अंग्रजों से बचने के लिए ईरान जाना पड़ा। और उन्होंने अपना बचा हुआ जीवन वही गुजारा। भगत सिंह की पढ़ाई दयानंद आयुर्वेदिक हाई स्कूल में हुई। 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड से भगत सिंह अत्यधिक दुखी और प्रभावित हुए जिस कारण उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा चलाये गए असहयोग आंदोलन का भरपूर सहयोग किया।

भगत सिंह अंग्रेजी सरकार से बिल्कुल भी नहीं डरते थे और गांधी जी के कहने पर उन्होंने ब्रिटिश बुक को खुलेआम जला दिया। अमृतसर में हुई चोरी चोरा चोरी घटना के बाद गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लिया गया परंतु भगत सिंह ने यहां गांधीजी के लिए गए फैसले को इनकार कर दिया जिसके कारण भगत सिंह ने अहिंसात्मक गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया और दूसरी पार्टी में हिंसात्मक रूप से जुड़े गए।

जब भगत सिंह नेशनल कांग्रेस से B.A की पढ़ाई कर रहे थे, तो इस दौरान उनकी मुलाकात सुखदेव थापर और भगवती चरण से हुई उस वक्त देश में आजादी की भयंकर लड़ाई चल रही थी और प्रत्येक देशभक्त जोरों शोरों में था। इसी कारण देश-प्रेम के भाव को प्रकट करते हुए भगत सिंह ने कॉलेज की पढ़ाई वहीं छोड़ दी और आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।

भगत सिंह यहीं से आजादी की लड़ाई में खुलेआम अंग्रेजों का विरोध करने लगे इस उम्र में भगत सिंह के घर वाले उनकी शादी की बात कर रहे थे, तो भगत सिंह ने अपनी देश के प्रति प्रेम की भावना दिखा कर कहा “यदि आजादी से पहले मेरी शादी हुई तो मेरी दुल्हन मेरी मौत होगी”।

स्वतंत्रता की लड़ाई

भगत सिंह स्वतन्त्रता लड़ाई के लिए सबसे पहले नौजवान भारत के संगठन में ज्वाइन हुए,परंतु जब उनके घर वालों ने उनसे वादा किया कि वे उनकी शादी के बारे में अब नहीं सोचेंगे तब भगत सिंह में अपने घर लौट कर वहां की किसान पार्टी से अपना संबंध जोड़ लिया। इस पार्टी के द्वारा ही वे विभिन्न क्षेत्रों के नौजवानों तक अपने संदेश पहुंचाने लगे।

1926 ईस्वी में भगत सिंह को नौजवान भारत सभा में सेक्रेटरी बना दिया तथा इसके बाद 1928 में उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन में हिस्सा लिया यह पार्टी चंद्रशेखर आजाद द्वारा बनाई गई थी।

इस संपूर्ण पार्टी ने 30 अक्टूबर 1928 को भारत में आने वाली साइमन कमीशन का विरोध किया जिस विरोध में लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई यहां से भगत सिंह का खून और भी खोल उठा। इसके बाद भगत सिंह खुलेआम अंग्रेजों का विरोध प्रदर्शन करने लगे।

भारत के सभी नौजवानों को अंग्रेजों के विरोध में जागृत करने का समर्थन भगत सिंह द्वारा लिया गया। 23 मार्च 1931 ईस्वी को भगत सिंह , सुखदेव तथा राजगुरु तीनों देशभक्तों को फांसी की सजा दी गई। कहा जाता है कि उन्हें 24 मार्च को फांसी की तारीख सुनाई गई थी। 

परंतु संपूर्ण देश में इन देशभक्तों की रिहाई के लिए विरोध प्रदर्शन अत्यधिक जोरों से पनप रहे थे। इस कारण ब्रिटिश सरकार ने डर के मारे फैसले बदल जाने के कारण उन्हें 23 मार्च की अर्धरात्रि में ही फांसी दे दी गई।

उम्मीद है की आपको भगत सिंह पर नारे | Bhagat Singh Slogans in Hindi से जुड़ी सभी जानकारी मिल चुकी होगी। 


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