विश्व पर्यावरण दिवस पर भाषण – Environment Day Speech In Hindi


दोस्तों अगर आप पर्यावरण दिवस पर भाषण देना चाहते हो तो आजका यह पोस्ट आपके लिए काफ़ी हेल्पफ़ुल हो सकता है, क्यूकी आज इस पोस्ट में हम paryavaran par speech, green day speech, Environment Day speech in hindi, विश्व पर्यावरण दिवस पर भाषण – Environment Day Speech In Hindi! के बारे में जानिंगे।

पर्यावरण शब्द दो शब्दों के मिश्रण से बना हुआ है! परि का अर्थ है “हमारे चारों ओर” और आवरण का अर्थ है “जो हमें सभी जगह से घेरे हुए हैं” हमारे पर्यावरण में व्यक्ति जीव पौधे अर्थात सभी प्राणी हैं।


लेकिन जब भी अक्सर बात होती है पर्यावरण की तो हमारा ध्यान जाता है एक स्वच्छ पर्यावरण की ओर! इसलिए आज विभिन्न राष्ट्र पर्यावरण के इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं अतः अक्सर इस विषय पर वाद-विवाद भाषण भी देखने को मिलते हैं।


इसलिए यदि आपको भी किसी आयोजन पर पर्यावरण के विषय पर अपने विचारों को एक भाषण के रूप में प्रस्तुत करने का मौका दिया है। तो आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको Environment Day Speech in Hindi में इस विषय पर कुछ ऐसे भाषण लेकर आए हैं जिनकी सहायता से एक अच्छी स्पीच स्टेज सुनाने में आप कामयाब होंगे।

तो चलिए आज के इस उपयोगी आर्टिकल की शुरुआत करते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस पर भाषण – Environment Day Speech In Hindi

भाषण 1 (Long Speech On Environment Day In Hindi)

आदरणीय महानुभाव, समस्त शिक्षकगण एवं सभी सहपाठियों को मेरी तरफ से सुप्रभात। आज मैं यहां आपके समक्ष पर्यावरण के विषय पर अपनी बात रखने जा रहा हूं। पृथ्वी पर जीवन जीने हेतु प्रकृति का संतुलन में होना बेहद आवश्यक है, प्रकृति द्वारा मनुष्य तथा अन्य जीव को इस पृथ्वी पर रहने हेतु पर्यावरण में उचित मात्रा में भोजन पानी वायु प्रदान की गई है।

परंतु प्रकृति द्वारा दिए गए इन अनमोल उपहारों के बदले में हम स्वयं प्रकृति को क्या दे रहे हैं क्या आपने कभी सोचा है?

जैसे-जैसे मनुष्य आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है वह पर्यावरण के संरक्षण को नजरअंदाज कर पर्यावरण का दोहन करने में लगा है। बढ़ता ,ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएं आज विभिन्न देशों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। लेकिन देखा जाए तो इन समस्याओं को जन्म भी तो मानव ने ही तो दिया है। भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य अपने निजी स्वार्थों के लिए प्रकृति को भूलता जा रहा है वह इसके संरक्षण की बात तक करना पसंद नहीं करता।

यदि प्रकृति समृद्ध एवं संतुलित होगी तो इससे प्राणी जगत का कल्याण होगा क्योंकि हम सभी पर्यावरण में रहते हैं।

दूसरी ओर यदि पर्यावरण दूषित होगा तो उसमें रहने वाले जीव को इसका खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा। अतः पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का सीधा अर्थ है हम स्वयं को एक भीर संकट में डाल रहे हैं।

अतः एक स्वास्थ्य पर्यावरण का निर्माण करने हेतु प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना अत्यंत जरूरी है। बढ़ती मानवीय इच्छाएं एवं जनसंख्या से प्राकृतिक संसाधन जैसे वायु जल मृदा का आज संरक्षण करना अत्यंत जरूरी हो चुका है। जैसे-जैसे जनसंख्या वृद्धि हो रही है वैसे वैसे लोगों को जीवन जीने हेतु जल एवं आवास के लिए भूमि की आवश्यकता पड़ती है। और ऐसे में मानव अपनी इन जरूरतों और इच्छाओं को पूर्ण करने हेतु पेड़ों की कटाई कर अपने लिए आवास बनाता है।

और जनसंख्या बढ़ती है तो मनुष्य अपनी मानवीय इच्छाओं के लिए सड़कों भवनों इत्यादि का भी निर्माण करता है! जिससे अधिक पेड़ों की कटाई होती है भूमि के अलावा मनुष्य कई अनावश्यक कार्यों के लिए जल की बर्बादी करता है जिससे अंत में नुकसान पर्यावरण को होता है।

इससे पर्यावरण असंतुलन उत्पन्न होता है, पर्यावरण में गंभीर समस्याएं जैसे ग्लोबल वार्मिंग, मृदा अपरदन, भूस्खलन तथा अन्य प्राकृतिक आपदाएं हमें अक्सर देखने को मिलती हैं।

अतः यह कहना गलत नहीं होगा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने मैं इस प्राणी जगत में मनुष्य का सर्वाधिक योगदान है। क्योंकि अन्य प्राणी सिर्फ अपनी आवश्यकता के अनुरूप ही संसाधनों का उपयोग करते हैं लेकिन मनुष्य अपनी मानवीय इच्छाओं की वजह से प्रकृति पर प्रभुत्व जताने की कोशिश में सदैव लगा रहता है।

जिस वजह से वह स्वयं के द्वारा किए जाने वाले प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की भी परवाह नहीं करता जिसे अंत में प्रकृति इस नुकसान की भरपाई भी दंड स्वरूप मनुष्यों से ही करती है। प्राकृतिक आपदाएं जैसे अकारण बाढ़ आना, अकाल पढ़ना, अधिक वर्षा या गर्मी होना ,भूस्खलन होना, भूकंप इसके सबसे बेहतरीन उदाहरण देखें जा सकते हैं।

अतः पर्यावरण को स्वस्थ एवं हरा भरा रखने के लिए आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण को लेकर कदम उठाएं इसमें सबसे महत्वपूर्ण है कि हम वृक्षारोपण करें यदि हम अपनी आवश्यकता के लिए एक पेड़ काटते हैं तो हमें चाहिए कि हम चार पेड़ उगाएं।

क्योंकि पर्यावरण के प्राकृतिक संतुलन में वृक्ष अहम भूमिका निभाते हैं यदि अधिक से अधिक पर्यावरण में पेड़ पौधे होते हैं तो इससे प्रदूषण के स्तर में कमी आती है। मृदा अपरदन की संभावनाएं निम्न हो जाती है इसके अलावा चूंकि पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करके मनुष्य को ऑक्सीजन देते हैं।

इसलिए कहा भी गया है कि एक पेड़ लगाना 100 गायों को दान देने के समान है। क्योंकि पेड़ों के बिना प्रकृति के संरक्षण की भी कल्पना नहीं की जा सकती। मात्र एक पेड़ लगाने से पर्यावरण में काफी सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है, आप सोच भी नहीं सकते पेड़ लगाने के इतने सारे फायदे हो सकते हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं।

कहा जाता है कि पेड़ लगाने से पर्यावरण में रहने वाले जीव जंतु का उद्धार होता है। क्योंकि पर्यावरण में रहने वाले कई सारे जीव पेड़ों पर आश्रित होते हैं। पेड़ पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करके हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं जिससे मनुष्य की स्वसन क्रिया पूर्ण कर पाता है। पेड़ों का न सिर्फ पौराणिक बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी काफी अधिक है।

पेड़ हमें गर्मियों में ठंडी हवा छाया प्रदान करते हैं वही वर्षा ऋतु में पेड़ मर्दा के बहाव को रोकते हैं। इसके अलावा हमारे दैनिक जीवन के अनेक कार्य जैसे फर्नीचर कागज, कपड़ा एवं औषधि इत्यादि पेड़ों से ही हमें प्राप्त होती है। आज पूरा विश्व प्रदूषण की मार झेल रहा है जिसे नियंत्रित करने एवं रोकने का कारगर विकल्प है वृक्षारोपण करना।

अनादि आदि काल से पेड़ की महत्वता पर बल दिया जाता रहा है और आज भी इसके महत्व में कमी बिल्कुल नहीं आई है। इसलिए शास्त्रों में पेड़ लगाना एक पुण्य का कार्य समझा गया है और यह पुण्य कोई भी उम्र का व्यक्ति बड़ी आसानी से कमा सकता है।

इसके अलावा पर्यावरण के संरक्षण हेतु हमें अन्य प्राकृतिक संसाधन जैसे जल की होने वाली बर्बादी को रोकना अत्यंत आवश्यक है। अतः संक्षेप में कहें दो यदि हमें पर्यावरण का संरक्षण करना है तो प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कदापि नहीं करना चाहिए। इन्हीं अंतिम शब्दों के साथ और इसी निवेदन के साथ मैं इस भाषण को विराम देना चाहूंगा,  हम सभी पर्यावरण संरक्षण को महत्व दें ,ताकि आने वाली पीढ़ी को हम एक स्वास्थ्य एवं सुखी जीवन दे सके।

भाषण 2 (Medium Speech On Environment Day In Hindi)

आज के इस आयोजन पर शामिल सभी लोगों मेरा नमस्कार!! आज मैं यहां आपके समक्ष पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दे पर एक लघु speech आपके समक्ष पेश कर रहा हूं।

हमारे वातावरण के अंदर जीव जंतु एवं अन्य सभी प्रकार के प्राणी निवास करते हैं अतः एक स्वस्थ जीवन हेतु हमारे वातावरण का शुद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। यदि मानव जीवन के संदर्भ से देखा जाए तो मनुष्य के वृद्धि दर एवं उचित विकास के लिए पर्यावरण का मनुष्य से सीधा संबंध है।

मनुष्य एवं अन्य जीवों के जीवन जीने हेतु पर्यावरण ने हमें सभी मूलभूत चीजें जैसे भोजन, पानी, रहने के लिए घर इत्यादि प्रदान किया गया है। वातावरण के बीच स्थापित हुए इस संतुलन के कारण ही हजारों वर्षों से प्राणी इस धरती पर निवास कर रहे हैं।

लेकिन दुर्भाग्य यह है कि मनुष्य जिसे ईश्वर द्वारा बेहतर जीवन हेतु मस्तिक दिया गया है! उसके द्वारा ही इस पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान इस पृथ्वी को पहुंचाया गया है। जिससे आज पर्यावरण का प्रदूषण स्तर काफी अधिक बढ़ चुका है यह आज एक वैश्विक समस्या हो चुकी है।

मनुष्य द्वारा पर्यावरण को नुकसान की गतिविधियां विभिन्न तरीकों से की जाती हैं फिर चाहे वह बढ़ती टेक्नोलॉजी की मांग हो, औद्योगिकरण की दर में वृद्धि होना जिसके परिणाम स्वरूप बढ़ते प्रदूषण को जन्म दिया है। प्रकृति को इस प्रकार नुकसान पहुंचाने की वजह से आज कई भयंकर परिणाम भी सामने आए हैं। जिनमें से कुछ हैं Global Warming का बढ़ना,  मौसम में असामान्य परिवर्तन होना, बढ़ता वायु पॉल्यूशन, ग्रीनहाउस प्रभाव इत्यादि।

देखा जाए तो इन सब का कारण है मानवीय इच्छाओं का बढ़ना। प्रकृति द्वारा वह सब कुछ हमें दिया गया है जो एक जीवन जीने के लिए आवश्यक है। परंतु अपने निजी स्वार्थों को देखते हुए पर्यावरण के विपरीत कार्य करने से मनुष्य को यह भयंकर परिणाम आज भुगतने पढ़ रहे हैं।

हम अपने दैनिक जीवन को ही देखें तो हम पाएंगे कि हम विभिन्न तरीकों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जैसे कि ऑटोमोबाइल्स का दिन प्रतिदिन उपयोग बढ़ते रहना, घरों में Ac, रेफ्रिजरेटर जैसे विद्युत उपकरणों का प्रयोग कर नुकसानदायक रासायनिक तत्वों को पैदा करना। पर्यावरण में इन सभी गैसों के परिवर्तन से एयर पॉल्यूशन का जन्म होता है।

परिणाम स्वरूप पर्यावरण में शुद्ध वायु की कमी होती है। और मनुष्य के स्वस्थ जीवन का स्तर लगातार तेजी से घटता रहता है प्रदूषण विभिन्न प्रकार के होते हैं जिनमें से कुछ प्रमुख हैं जल प्रदूषण वायु प्रदूषण मृदा प्रदूषण इत्यादि।

संक्षेप में कहा जाए तो पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है और आज यह वैश्विक समस्या विभिन्न देशों के लिए बड़ी चिंता जनक साबित हो रही। हालांकि विभिन्न देशों में  लोग आज इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं लेकिन इससे पार पाना इतना आसान नहीं है।

परंतु हम जरूर अपने दैनिक जीवन में ऐसे कार्य कर सकते हैं जिनसे अपने पर्यावरण को हम दूषित ना करके इसे हरा-भरा बना सकते हैं

वातावरण को स्वस्थ रखने के लिए कुछ ध्यान रखने योग्य कार्य:-

  • घर के आसपास पेड़ जरूर लगाएं। पेड़ मानव  को ठंडी हवा प्रदान करने के साथ पर्यावरण के प्रदूषण स्तर को कम करने में बेहद लाभदाई होते हैं।
  • जल संरक्षण करें। दैनिक जीवन में जल की प्रत्येक बूंद बचाने के लिए घर में सभी सदस्यों को एवं अपने आस-पड़ोस में लोगों को जागरूक करें।
  • बिजली की बचत करें आवश्यकता ना होने पर इसका उपयोग ना करें।
  • पेट्रोल-डीजल जैसे पदार्थ जिनसे पर्यावरण प्रदूषित होता है, आवश्यकता पड़ने पर ही इनका इस्तेमाल करें।

पशु पक्षियों को जीने दें एक शिक्षित एवं समझदार व्यक्ति भली भांति जानता है कि पर्यावरण में हम सब का समान हक है। अतः इस पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए उनके साथ हिंसा ना करें।

साथियों यदि हम यह कुछ छोटे-छोटे एवं जरूरी कार्य अपने दैनिक जीवन में करते हैं! तो पर्यावरण की जो समस्या आज हमारे समक्ष उपस्थित है इसे जरूर कम किया जा सकता है धन्यवाद।

भाषण 3 (Short Speech On Environment Day In Hindi)

यहां उपस्थित आदरणीय प्रधानाचार्य जी शिक्षक गण एवं मेरे प्रिय सह पाठियों को सुप्रभात। आज मैं इस अवसर पर आपके समक्ष पर्यावरण के विषय पर एक लघु स्पीच सुनाने जा रहा हूं। पर्यावरण एक प्राकृतिक शब्द है जिसके अंतर्गत पानी, हवा, पेड़, पौधे जीव जंतु इत्यादि हमारे प्रतिवेश के रूप में मौजूद हैं। ईश्वर द्वारा हमें  प्राकृतिक संसाधनों के साथ एक संतुलित वातावरण का एक अनमोल तोहफा मिला हुआ है।


परंतु वर्तमान में पर्यावरण की समस्या या कहे तो पर्यावरण के स्वास्थ्य में कमी देखी गई है।जिसकी वजह मनुष्य द्वारा अपने निजी हितों को देखते हुए पर्यावरण का दोहन किया जाना है परिणामस्वरूप पर्यावरण का संतुलन डगमगा गया है।

प्रकृति द्वारा प्रचुर मात्रा में हमें प्राकृतिक संसाधन दिए गए हैं जिनका उपयोग कर एक मानव स्वस्थ रूप से इस पृथ्वी पर जीवन जी सकता है। लेकिन यदि उन प्राकृतिक संसाधनों का असीमित मात्रा में अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए जब उपयोग किया जाता है तो इससे न सिर्फ सामाजिक जीवन में असमानताएं आती हैं। बल्कि इससे पर्यावरण का भी नुकसान होता है कई ऐसे स्थान हैं जहां पर प्राकृतिक संसाधन जैसे जल स्तर में गिरावट हो रही है। वे इसी का परिणाम है।

इसके अलावा पर्यावरण में संतुलन बनाने का कार्य करने वाले जीव जंतुओं की संख्या में कमी आना, ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ना, मौसम में असामान्य परिवर्तन होना, अकाल बाढ़ आना, मृदा अपरदन होना जैसी समस्याएं मनुष्य को इस पर्यावरण के खिलाफ कार्य करने की वजह से ही झेलनी पड़ रही है।

मानव एवम् अन्य जीव जंतुओं को हमारी वजह से किसी भी तरह का नुकसान ना हो इसके लिए आवश्यक है कि हम अपने पर्यावरण का उचित ध्यान रखें इस पर्यावरण में प्रदूषण को कमी लाएं।

अतः उसके लिए जरूरी है कि हम आज से ही एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर पर्यावरण को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी को अपने दैनिक जीवन की एक आदत बनाएं। धन्यवाद।।

उम्मीद है की अब आपको paryavaran par speech, green day speech, Environment Day speech in hindi, विश्व पर्यावरण दिवस पर भाषण – Environment Day Speech In Hindi! के बारे में काफ़ी जानकारी मिल चुकी होगी।

उम्मीद है की आपको विश्व पर्यावरण दिवस पर भाषण – Environment Day Speech In Hindi! का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।


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