गाँधी जयंती पर भाषण – Gandhi Jayanti Speech In Hindi

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सत्य एवं अहिंसा की नीति पर चलकर देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले देश के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी यानी कि गांधी जी की जयंती का दिन भारत में एक राष्ट्रीय पर्व की तरह होता है जिसे धूमधाम से देश भर में मनाया जाता है।


आजादी की लड़ाई में स्वतन्त्रता सेनानीयों के बलिदानों को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। और उन्हीं महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे महात्मा गांधी जिन्होंने आजादी से पूर्व एवं आजादी के उपरांत भी देश की भलाई के लिए अनेक कार्य किए। इसलिए देशभर में 2 अक्टूबर का दिन गांधी जयंती के रूप में पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है।


इस अवसर पर स्कूलों, शिक्षण संस्थानों समेत अन्य सार्वजनिक स्थलों पर विभिन्न प्रकार के संस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं! यदि आपको भी किसी मंच से गांधी जयंती के अवसर पर स्पीच देने का मौका मिला है।

तो इस लेख में हम आपके लिए गांधी जयंती के मौके पर भाषण लेकर आए हैं! आशा है गांधी जयंती के विषय पर दिए गए इन भाषणों की सहायता से आप एक सुनियोजित स्पीच तैयार करके मंच से सुना पाएंगे।

गाँधी जयंती पर भाषण – Speech On Gandhi Jayanti In Hindi

भाषण 1 (Long Speech On Gandhi Jayanti In Hindi)

आदरणीय महानुभाव, प्रधानाचार्य जी, समस्त शिक्षक गणों को मेरा सुप्रभात। जैसा कि हम सभी को ज्ञात है कि आज हम यहां सभी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 151वीं जयंती के अवसर पर इस समारोह में उपस्थित हुए हैं। अतः इस अवसर पर मुझे गांधी जयंती के अवसर पर अपने विचारों को आपके समक्ष रखने का सौभाग्य मिला है।

सत्य एवं अहिंसा गांधीजी के दो प्रमुख सिद्धांत थे। जिन पर चलकर उन्होने भारतीय जनता को ब्रिटिश शासन से आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आजादी की लड़ाई में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के खातिर अपना सर्वस्व त्याग दिया। गांधीजी भी उन्हीं महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से उनके विद्रोह को कुचलने की राजनीति बनाई।


महात्मा गांधी जिन्हें हर भारतीय सम्मान से बापू, राष्ट्रपिता जैसे नामों से पुकारा है। उनका पूर्ण नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म गुजरात के एक तटीय शहर पोरबंदर नामक स्थान पर 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था। उनकी माता का नाम पुतलीबाई एवं पिता का नाम करमचंद गांधी था जो कि उस समय के पोरबंदर के दीवान थे।

आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के अतुलनीय योगदान की वजह से उन्हें सुभाष चंद्र बोस द्वारा सर्वप्रथम राष्ट्रपिता के नाम से संबोधित किया गया वहीं गांधीजी को महात्मा की उपाधि गुरु रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा दी गई थी। 2 अक्टूबर का यह विशेष दिन गांधी जयंती के साथ साथ पूरी दुनिया में अपने अहिंसावादी सिद्धांतों की छाप छोड़ने वाले महात्मा गांधी की याद में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

गांधीजी पेशे से एक वकील थे तथा इंग्लैंड में वकालत की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने दक्षिण अफ्रीका मैं बतौर प्रवासी  वकालत करना प्रारंभ किया। और वहां रह रहे भारतीयों के खिलाफ उस समय होने वाले भेदभाव के लिए उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाकर सत्याग्रह शुरू कर दिया।

तत्पश्चात वर्ष 1915 में गांधी जी जब भारत आए। और यहां किसानों मजदूरों के साथ हो रहे भेदभाव और उन्हें भूमिकर से आजादी दिलाने में उनके हक की लड़ाई लड़ने के लिए सभी को एकजुट किया।

कुछ समय बाद उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभाली और देश की अनेक सामाजिक कुरीतियों प्रथाओं को समाज से खत्म करने के लिए कार्य करना शुरू किया जैसे कि जाति एवं धर्म के आधार पर भेदभाव को खत्म कर लोगों को एकत्रित करना देश को भुखमरी गरीबी जैसे हालातों से निजात दिलाना महिलाओं के अधिकारों का विस्तार करना इत्यादि।

इसके साथ ही यह वह समय था जब अंग्रेज भारतीय अर्थव्यवस्था, भारतीय लोगों का शोषण कर रहे थे। अतः ब्रिटिश शासन की भारत पर पकड़ को देखते हुए गांधी जी बेहद चिंतित थे! अतः वर्ष 1930 में उनके द्वारा नमक के विरोध में किया गया नमक सत्याग्रह और वर्ष 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन से उन्हें देश में काफी ख्याति प्राप्त हुई देश की जनता जान चुकी थी एक व्यक्ति सत्य एवं अहिंसा के रास्ते पर चलने वाला हमें आजादी की जंजीरों से मुक्ति दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है।

और जनमानस ने एकजुट होकर अंग्रेजो के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से गांधी जी के सिद्धांतों में चलकर लड़ाई लड़ी और मजबूरन अंग्रेजों को देश छोड़कर भागना पड़ा। हालाकि बात हो दक्षिण अफ्रीका में भारत में लोगों की हक की लड़ाई लड़ने के कई दौरान गांधीजी को कई अवसरों पर जेल भी जाना पड़ा। लेकिन उन्होंने सत्यता एवं अहिंसा को कभी नहीं त्यागा परिणाम स्वरूप आज उन्हें सत्य एवम अहिंसा की मूर्ति के रूप में विश्व की जनता देखती है।

सादा जीवन उच्च विचार के इस कथन पर विश्वास रखने वाले गांधीजी लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सदैव कार्य करते थे। फिर चाहे वह बात हो स्वच्छता को लेकर संदेश देने की या फिर शाकाहार अपनाने की, धूम्रपान मद्यपान त्यागने एवं छुआछूत के विरोध में खड़े होने की।

आजादी के 70 से अधिक वर्षों के उपरांत भी आज प्रति वर्ष देशभर में गांधी जी की याद में जयंती दिवस मनाया जाता है। इस दिन गांधी जी के अमूल्य योगदान के लिए नई दिल्ली के राजघाट पर भव्य समारोह आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर प्रार्थनाएं फूल मालाएं चढ़ाने के साथ-साथ रघुपति राघव राजा राम जैसे भजनों के साथ गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है

मैं इस अवसर पर आपके समक्ष यही कहना चाहूंगा कि गांधीजी के जीवन से हमें भी अपने देश के लिए अपने समाज के लिए कुछ बेहतर करने एवं हमेशा सच्चाई एवं अहिंसा के पथ पर चलकर समाज में लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए योगदान देने कि सीख लेनी चाहिए।

और इसी निवेदन के साथ में गांधीजी के एक प्रिय कथन खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं के साथ आज के इस भाषण को यहीं विराम देना चाहूंगा। मुझे सुनने के लिए आप सभी का दिल से धन्यवाद एक बार फिर से गांधी जयंती की आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं।

भाषण 2 (Medium Speech On Gandhi Jayanti In Hindi)

आदरणीय प्रधानाचार्य जी शिक्षक गण एवं यहां उपस्थित सभी सहपाठियों को मेरा सुप्रभात। आज हम यहां सभी 151 वीं जयंती के मौके पर उपस्थित हैं मैं अपने कक्षा अध्यापक को विशेष धन्यवाद कहना चाहूंगा जो उन्होंने मुझे इस शुभ अवसर पर चंद शब्द बोलने का मौका दिया।

जैसा कि हम सभी को ज्ञात है प्रतिवर्ष हमारे देश में 2 अक्टूबर को एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में हमारे देश में गांधी जयंती मनाई जाती है।

गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को एक सामान्य हिंदू परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम पुतलीबाई एवं पिता का नाम मोहनदास करम चंद्र गांधी का। पूरे जीवन काल के दौरान गांधीजी ने अपने असाधारण कार्यों एवं अहिंसावादी सोच से पूरी दुनिया की सोच में परिवर्तन ला दिया।

देश की आजादी के लिए उनके द्वारा किया गया संघर्ष देश के प्रत्येक नागरिक के लिए अविस्मरणीय है पूरी जिंदगी गांधीजी का एकमात्र उद्देश्य सत्य एवं अहिंसा की राह पर चलकर आजादी एवं शांति की स्थापना करना था। और इस लक्ष्य की प्राप्ति करने हेतु उनके द्वारा भारत और दक्षिण अफ्रीका में कहीं ऐतिहासिक आंदोलनों की शुरुआत की गई।

गांधीजी के अनुसार अहिंसा सबसे बड़ा कर्तव्य है। उनका मानना था कि अहिंसा का हमें जहां तक हो सके पालन करना और हिंसा से सदैव दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए। गांधी जी एक महान व्यक्ति थे जिन्होंने देश की आजादी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी जिनकी वजह से आज हम एक स्वतंत्र राष्ट्र में खुलकर जी पा रहे हैं।

यही वजह है कि प्रत्येक नागरिक के लिए 2 अक्टूबर एक यादगार तिथि है इसलिए पूरे भारतवर्ष में 2 अक्टूबर गांधी जयंती के रूप में मनाई जाती है। इस दिन देश भर के विभिन्न स्कूलों में शिक्षण संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थानों पर गांधी जी के सम्मान हेतु उनकी याद में विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं।

देश की राजधानी नई दिल्ली के राजघाट पर गांधी जी के समाधि स्थल पर प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति द्वारा उपस्थित होकर फूल मालाओं, भजनों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया जाता है। बिना जाति धर्म के भेदभाव के बगैर सभी समुदायों द्वारा समान रूप से महात्मा गांधी को इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। इसलिए भारत के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में गांधी जयंती के अवसर पर धूमधाम देखी जा सकती है।

गांधी जी का प्रिय भजन रघुपति राघव राजा राम को इस अवसर पर विशेष तौर पर बजाया जाता है साथ ही इस अवसर पर धार्मिक पुस्तकें भी पढ़ी जाती है।

देश की सभी निजी एवं सरकारी स्कूल इस दिन राष्ट्रीय अवकाश की वजह से बंद रहते हैं इसलिए गांधी जी की याद में सभी विद्यार्थियों द्वारा 1 दिन पहले अर्थात 1 अक्टूबर के दिन स्कूलों में देश भक्ति एवं गांधीजी के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रकार के गीत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

और हां न सिर्फ गांधी जी भारत के लिए एक आदर्श एवं महान व्यक्तित्व थे बल्कि पूरी दुनिया में उनके अहिंसावादी  सिद्धांत के लिए उन्हें याद किया जाता है। इसलिए 2 जनवरी के दिन ही गांधी जयंती के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के के रूप में इस दिन को मना कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

गांधीजी जी सत्यता के रास्ते पर चलने पर विश्वास करते थे उनके अनुसार झूठ बोलना बड़ा पाप है। एवं वह किसी भी लड़ाई को अहिंसा के जरिए जीतने पर विश्वास रखते थे। और वाकई उनकी अहिंसा वादी नीति ने भारत को आजादी दिलाने ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

तो गांधीजी के प्रेरणादायक विचारों एवं उनके आदर्श जीवन से हम सभी को सीख लेकर हमें भी अपने जीवन में कुछ ऐसा जरूर करना चाहिए जिससे समाज में देश में तथा पूरी दुनिया में एक सकारात्मक परिवर्तन आ सके! और अपने अच्छे कर्मों से हम भी लोगों के दिलों में सदा के लिए अमर रहे धन्यवाद।

भाषण 3 (Short Speech On Gandhi Jayanti In Hindi)

आदरणीय प्रधानाचार्य जी शिक्षक गण एवं यहां उपस्थित सभी लोगों को मेरा नमस्कार आज मैं यहा गांधी जयंती के इस शुभ अवसर पर आपके समक्ष महात्मा गांधी के जीवन पर एक लघु भाषण प्रस्तुत करने जा रहा हूं। अपनी महान सोच एवं कर्मों से पूरे जीवन काल के दौरान देश हित में कार्य करने वाले मोहनदास करमचंद को आज हमारा देश राष्ट्रपिता के रूप में जानता है।

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर गुजरात में हुआ था। एक औसत दर्जे के छात्र होने के बावजूद भी उनके अंदर अनुशासन एवं मानव जीवन के व्यावहारिक गुण कूट- कूटकर भरे थे! स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात उन्होंने इंग्लैंड में जाकर वकालत की शिक्षा प्रारंभ की।

शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वे भारत आए और बतौर वकील उन्होंने मुंबई में सेवाएं दी। परंतु वकालत का पेशा उन्हें रास नहीं आया। क्योंकि उस समय अंग्रेजों द्वारा भारतीयों का कड़ा शोषण किया जा रहा था अतः उन्होंने देश सेवा का निर्णय लिया। उन्होंने आजादी की लड़ाई के दौरान भारतीयों को एकजुट करने उनमें देश की आजादी के प्रति जुनून भरने एवं अंग्रेजों से खिलाफ इस लड़ाई को अहिंसक तरीके से जीतने के लिए तैयार किया।

तत्पश्चात 15 अगस्त वर्ष 1947 को हमारा देश स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर घोषित किया गया। तो गांधी जी द्वारा आजादी के दौरान देश के समक्ष आई चुनौतियों से भी निपटने कि काफी कोशिशें की गई। देश की आजादी के पश्चात उन्होंने भारत-पाकिस्तान के हुए विभाजन एवं देश में चल रही धार्मिक हिंसा को रोकने की भी काफी कोशिश की। वे किसी भी लड़ाई को अहिंसा से जीतने पर विश्वास रखते थे।

30 जनवरी 1948 को इस महापुरुष ने अंतिम सांसे ली।

देश की आजादी में उनके संघर्ष एवम् योगदान के साथ ही अपने जीवन काल के दौरान देश हित में की गई उनकी सेवा को आज भी प्रत्येक भारतीय  याद करता है, वे सर्वदा इसी तरह जनमानस द्वारा याद किए जाते रहेंगे।

तो दोस्तों उम्मीद है की अब आपको गाँधी जयंती पर भाषण, Short and Long speech on Gandhi Jayanti in hindi for school, 2 october gandhi jayanti in hindi, Gandhi Jayanti Speech In Hindi, गाँधी जयंती पर स्पीच से जुड़ी पूरी जानकारी मिल चुकी होगी।

उम्मीद है की आपको गाँधी जयंती पर भाषण – Gandhi Jayanti Speech In Hindi! का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।


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