ग्लोबल वार्मिंग पर भाषण – Global Warming Speech In Hindi


दोस्तों अगर आप ग्लोबल वार्मिंग पर भाषण देना चाहते हो तो आजके इस पोस्ट में हम ग्लोबल वार्मिंग के बारे में जानिंगे causes of global warming in hindi, global warming ke khatre, short and long speech on Global Warming, ग्लोबल वार्मिंग पर भाषण – Global Warming Speech In Hindi! के बारे में।


Global Warming आज विभिन्न देशों के सामने एक मुख्य चुनौती बनकर उभरी है, जिससे निपटना मुश्किल भी है और जरूरी भी क्योंकि जिस तरीके से पृथ्वी और वायुमंडल के तापमान में वृद्धि हो रही है मनुष्य के लिए जीवन जितना उतना ही पीड़ादाई हो रहा है।

हालांकि आज भी लोग इस समस्या के प्रति जागरूक नहीं हैं लोग भाग दौड़ भरे जीवन में global warming को नजरअंदाज कर रहे हैं। लेकिन आपको बता दें वैज्ञानिकों का मानना है कि 21वी सदी में मानव जाति के लिए सबसे बड़ा खतरा ग्लोबल वार्मिंग है।


अतः इस समस्या से रूबरू होना हर व्यक्ति के लिए जरूरी हो जाता है। आज हम Global warming speech in Hindi के इस लेख में आपको इस समस्या के कारण तथा निवारण की चर्चा कुछ भाषणों के माध्यम से करेंगे।

ग्लोबल वार्मिंग पर भाषण – Global Warming Speech In Hindi

ग्लोबल वार्मिंग पर भाषण - Global Warming Speech In Hindi

भाषण 1 (Long Speech On Global Warming In Hindi)

आदरणीय अध्यापक, शिक्षक गण और यहां उपस्थित सभी छात्रों को मेरा सुप्रभात! आज मैं यहां इस मौके पर आपके समक्ष ग्लोबल वार्मिंग जैसे पर्यावरणीय समस्या पर भाषण के माध्यम से अपने विचारों को रखने के लिए उपस्थित हूं। इस पृथ्वी पर समस्त मानव जाति, वन्य जीव जंतु एवं सभी जीवो के लिए विनाशदाई बनकर उभरी ग्लोबल वार्मिंग की समस्या याज विभिन्न देशों के लिए चिंतनीय हैं।

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध के मुताबिक 1900 ई० से 2000 तक यानी कि पिछले 100 सालों के अंदर पृथ्वी कबऔसत तापमान बढ़कर 1 डिग्री फारेनहाइट हो गया। और वर्ष 1970 में रिकॉर्ड की गई औसतन गर्मी से यदि वर्तमान की गर्मी की तुलना की जाए तो इसमें लगभग 3 गुना वृद्धि पाई गई है। लेकिन मुद्दा यह है कि पृथ्वी की सतह तथा वायुमंडल में होने वाली एक गर्मी आखिर इतनी बढ़ कैसे गई?

तो जवाब है मानवीय गतिविधियां मनुष्य द्वारा बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों से निकलता धुंआ, बिना सोचे समझे जंगलों में लगाई जाने वाली आग तथा फैक्ट्रियों, औद्योगीकरण से लगातार बढ़ता ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन ग्रीन हाउस गैसें हमारे वायुमंडल में तापमान की वृद्धि करने में मुख्य रूप से उत्तरदाई हैं। क्योंकि इन गैसों के उत्सर्जन से जब यह हमारे वातावरण में प्रवेश करती हैं तो इनका बाहर निकल पाना मुश्किल होता है जिस वजह से यह पृथ्वी की सतह तथा वायुमंडल में तापमान में वृद्धि करती हैं।

लगातार बढ़ती गर्मी से आज ग्लेशियर पिघल रहे हैं, परिणाम स्वरुप अकारण विभिन्न स्थानों पर जल स्तर बढ़ता जा रहा है जिससे बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो रही है साथ ही मनुष्य जीवन के लिए बढ़ती गर्मी से जीवन जीना कठिन होता जा रहा है। वैज्ञानिक बताते हैं जिस तरह ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन हो रहा है उससे संभव है 21वीं शताब्दी में यह औसत तापमान 3 डिग्री से बढ़कर 8 डिग्री जा सकता है। जिसके कारण हिमखंड पिघलने लगेंगे, कई राज्य, जिले बाढ़ की चपेट में डूब जाएंगे।

प्राणियों के लिए इस गर्मी में जीवन जीना कठिन होगा और इस प्रकार माना जा रहा है यह तबाही किसी भी तेज भूकंप के झटकों या विश्वयुद्ध से भी भयंकर होगी। क्योंकि हर जगह तबाही मची होगी और मनुष्य चाह कर भी इसे नियंत्रित नहीं कर पाएगा। और शायद खतरों की आशंका को विभिन्न देश समझ रहे हैं। और क्योंकि यह किसी एक देश की समस्या नहीं है बल्कि इसकी चपेट में पूरा विश्व आएगा।

अतः विभिन्न राष्ट्रों को इसके विषय पर जागरूक करने के लिए अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंच से पर्यावरण दिवस तथा अन्य मौकों पर बातचीत एवं सुझाव दिए जाते है। इसी समस्या के निवारण हेतु वर्ष 1997 में ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को कम करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि की गई। जिसका नाम क्योटो प्रोटोकॉल रखा गया इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम से कम करना था। और इस प्रोटोकॉल के तहत जितने भी देश जुड़े हुए हैं, वह सभी ग्रीन हाउस गैसों में कमी लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

एक नागरिक के तौर पर यदि हम भी अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे प्रयास करें तो हम ग्लोबल वार्मिंग में कमी लाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग कम करने के उपाय

इसकी शुरुआत सबसे पहले घर में होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से होगी क्या आप जानते हैं, AC, refrigerator जैसी cooling मशीन, ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। क्योंकि यह CFC Gas उत्पन्न करती हैं, अतः वैज्ञानिक भी मानते हैं कि इन उपकरणों का कम से कम उपयोग करके ग्लोबल वार्मिंग में कमी लाई जा सकती है।

आदिकाल से वृक्षारोपण पर महत्व दिया जाता रहा है लेकिन अक्सर हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हमारे पर्यावरण में वृक्षों के लाभों से हम सभी परिचित हैं लेकिन क्या आप जानते हैं ग्लोबल वार्मिंग को भी कम करने में वृक्षारोपण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। तो जितना हो सके वृक्षारोपण करना इस परिस्थिति में हमारे लिए लाभदाई है।

वाहनों से निकलने वाला धुआं ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदाई है। अतः अगर आप भी वाहन का इस्तेमाल करते हैं तो आपको पर्यावरण मानकों का सख्ती से पालन करना चाहिए।

  • संभव हो तो पैदल या साइकिल का इस्तेमाल कम दूरी की यात्रा तय करने के लिए करें।
  • पानी की प्रत्येक बूंद की कीमत समझते हुए इसे बर्बाद होने से बचाएं।
  • कोयले से निकलने वाली ऊर्जा के स्थान पर पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा का अधिक उपयोग करें।
  • जरूरत ना होने पर विद्युत उपकरणों को switch off करना न भूलें!
  • Factory, औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकलता प्रदूषित धुआं पूरे वायुमंडल को नुकसान पहुंचाता है।
  • अतः हमें ऐसे उपाय करने होंगे जिससे औद्योगिक चिमनी से उत्पन्न होने वाला प्रदूषण कम से कम हो।
  • प्लास्टिक के कम से कम उपयोग को लेकर कही गई बातों का ईमानदारी से पालन करें।

इसके अलावा ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने हेतु सरकार एवं राज्य को मिलकर काम करना चाहिए। पेश है वे मानवीय गतिविधियां जिनकी वजह से सबसे अधिक मात्रा में पर्यावरण में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है।

  • Power station से
  • Industry से
  • गाड़ियों से
  • जीवाश्म ईंधन
  • बायोमास जलने से
  • कचरा जलाने से

याद रखें वैज्ञानिक भी यह पूरी तरह स्पष्ट कर चुके हैं कि इस समस्या का प्रमुख कारण मानवीय गतिविधियां हैं। और प्रत्येक मनुष्य अब ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देकर इस संकट से बच सकते हैं।

भाषण 2 (Medium Speech On Global Warming In Hindi)

आप सभी को मेरी ओर से नमस्कार! मैं मोहित नेगी आज आपके समक्ष हाजिर हूं एक ऐसे मुद्दे पर बात करने के लिए, जो मुद्दा एक संकट के रूप में पूरे विश्व के समक्ष आज उपस्थित है। आज मै इस मंच के माध्यम माध्यम से global warming पर एक लघु भाषण के जरिए अपने विचार आप तक साझा करूंगा।

आपने सुना एवम् पढ़ा होगा कि पिछले कुछ दशकों से अकारण जलवायु में परिवर्तन हो रहा है। ठीक समय पर वर्षा न होना, सर्दियों के दिनों का लगातार कम से कम होना, आखिर ऐसा क्यों यह प्राकृतिक संतुलन आखिर बिगड़ा कैसे? तो जवाब है ग्लोबल वॉर्मिंग।

हमारे वातावरण में लगातार ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण तापमान में अनियंत्रित रूप से वृद्धि हो रही है। जिसके कई भयंकर परिणाम सामने आ रहे हैं। लगातार बढ़ती गर्मी से मनुष्य के लिए बिना वातानुकूलित कमरों के जीवन जीना अत्यंत कठिन हो चुका है। हर साल अनेक वन्य जीव जंतु, पशु पक्षी ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौत के घाट उतर जाते हैं। या कई ऐसी प्रजातियां लुप्त होने की कगार में है।

हिमखंड जहां 12 महीने बर्फ की चादर ओढ़े दिखाई देते थे, आज पिघल रहे हैं। जल स्तर के बढ़ने से बाढ़ के खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण से मनुष्य के लिए सांस लेना दूभर हो चुका है वायुमंडल में शुद्ध ऑक्सीजन की तलाश में कई नए तरीके मनुष्य द्वारा खोजे जा रहे हैं।

इसके अलावा बेमौसम बारिश होना, बाढ़ आना इत्यादि सभी ग्लोबल वार्मिंग के ही परिणाम है। और किसी भी लिहाज से इन्हें मनुष्य या किसी भी प्राणी जाति के लिए हितकारी नहीं कहा जा सकता। तो प्रश्न उठता है कि आखिर यह समस्या उत्पन्न हुई कैसे? सीधा और स्पष्ट जवाब है मानवीय क्रियाएं जिनकी वजह से आज यह संकट झेलना पड़ रहा है।


मनुष्य द्वारा किए पेड़ों के कटाव से जिस तरह औद्योगीकरण को बढ़ावा मिला है। उससे उत्पन्न प्रदूषण की वजह से कार्बन डाइऑक्साइड नामक गैस की मात्रा वायुमंडल में बढ़ चुकी है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग भी बड़ी है। इसके कई और भी कारण हैं लेकिन मुख्यतः ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने के पीछे कारण हैं ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन! अपने दैनिक जीवन में हमारे द्वारा इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे Ac, फ्रीज तथा अन्य वातानुकूलित उपकरणों के अलावा वाहनों के उपयोग के कारण पेट्रोलियम ईंधन का उपभोग बढ़ रहा है।

कोयले के इधन का इस्तेमाल विभिन्न कार्यों के लिए हो रहा है यह सभी क्रियाएं ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करती हैं। एक बार यह गैसे वायुमंडल में आ जाए तो इनका बाहर जाना बहुत मुश्किल होता है। ग्रीन हाउस गैसें धीरे-धीरे पृथ्वी की सतह के साथ वायुमंडल के ताप को बढ़ाती है। जिससे चारों ओर का तापमान गर्म होने लगता है और इससे उतपन्न भीषण गर्मी की वजह से आज नकारात्मक प्रभाव झेलने पड़ रहे है।

अगर हमें global warming में कमी लानी है तो मानव को अनुशासन के साथ ग्लोबल वार्मिंग कम करने के तरीकों का पालन करने के साथ-साथ उन गतिविधियों को अंजाम देने से बचना होगा जिन से यह समस्या बढ़ रही है।

भाषण 3 (Short Speech On Global Warming In Hindi)

आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकों और प्रिय छात्रों को मेरा नमस्कार आज मैं यहां lक्ष ग्लोबल वार्मिंग जैसे चिंतनीय मुद्दे पर एक लघु भाषण आपके समक्ष पेश करने जा रहा हूं। ग्लोबल वार्मिंग मानवीय गतिविधियों द्वारा उत्पन्न हुई एक वैश्विक समस्या है जिसके कारण पृथ्वी का तापमान निरंतर बढ़ रहा है और इसका नकारात्मक प्रभाव मनुष्य समेत इस पर्यावरण में रहने वाले सभी जीवो को झेलना पड़ रहा है।

हमारे वातावरण में निरंतर बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग के कारण कई तरह के दुष्परिणाम उभर कर सामने आते हैं जैसे कि अकारण जलवायु परिवर्तन होना, प्रदूषण में निरंतर वृद्धि होना इत्यादि। जिससे पर्यावरण में असंतुलन उत्पन्न होता है मनुष्य और अन्य जीवो के लिए जीवन जीना कठिन होता जा रहा है। ऐसे समय में ग्लोब्ल वार्मिंग के कारणों और इसके निवारण पर चर्चा करना अत्यंत जरूरी हो जाता है।

हमारे वातावरण में बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग के पीछे अनेक कारण हैं। जिसमें मुख्यतः ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को उत्तरदाई माना जाता है। कई प्रकार की मिश्रित गैसे जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, ओजोन इत्यादि ग्रीन हाउस गैसों के ही प्रकार हैं जब यह गैसें वायुमंडल में प्रवेश करती हैं तो इनका बाहर आना अत्यंत मुश्किल होता है। जिस वजह से यह अंदर ही अंदर पृथ्वी के ताप में वृद्धि का कारण बनती हैं।

इन गैसों का उत्सर्जन कई तरह कि मानवीय गतिविधियों से होता है। मनुष्य द्वारा चलाए जाने वाले वाहनों से निकलता धुआं औद्योगिक चिमनियों से निकलता प्रदूषण इत्यादि। यही नहीं अपने दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले विद्युत उपकरण जैसे एयर कंडीशनर, फ्रिज इत्यादि अन्य कूलिंग मशीन और इनके अलावा परंपरागत चूल्हे तथा पेट्रोलियम ईंधन भी ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन करने के लिए मुख्य रूप से उत्तरदाई हैं।

वर्तमान स्थिति को देखा जाए तो किसी भी हाल में ग्लोबल वार्मिंग को खत्म करना मनुष्य के लिए लगभग नामुमकिन है। लेकिन हालांकि अगर प्रत्येक मनुष्य इस समस्या से परिचित रहे तो दैनिक रूप से कुछ छोटे-छोटे कार्यों को करके ग्लोबल वार्मिंग में कमी जरूर लाई जा सके जिससे आने वाला भविष्य खतरे में डाल सकते हैं।

पेड़ों की कटाई कम पर्यावरण में वृक्षारोपण करना। क्योंकि इससे एक तरफ पर्यावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी साथ ही होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी।

  • आवश्यकता न होने पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे पंखा, लाइट इत्यादि सभी उपकरणों को बंद कर देना।
  • जल की बर्बादी होने से रोकना, जिसके लिए मनुष्य द्वारा जल बचाने के उपाय पर गौर किया जा सकता है।
  • अगर आप निजी वाहन का इस्तेमाल करते हैं, तो पर्यावरण मानकों का ध्यान रखकर वाहन का इस्तेमाल करें।
  • इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग ना करके यदि हम सूझबूझ के साथ इस्तेमाल करें तो ग्लोबल वार्मिंग को घटाने में योगदान दिया जा सकता है।
  • कम दूरी के सफर को तय करने के लिए आप  पैदल या साइकिल यात्रा को अधिक महत्व दें।

तो ग्लोबल वार्मिंग के कारणों का पता करने के बाद यदि आप वास्तव में इस गंभीर समस्या के प्रति सचेत हैं तो आपको इन उपायों को जरूर अपनाना चाहिए साथ ही आसपास अन्य लोगों को भी इस समस्या के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है।

तो दोस्तों आशा करते हैं की अब आपको short and long speech on Global Warming, ग्लोबल वार्मिंग पर भाषण – Global Warming Speech In Hindi! से जुड़ी पूरी जानकारी मिल गयी होगी।

उम्मीद है की आपको ग्लोबल वार्मिंग पर भाषण – Global Warming Speech In Hindi! का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।


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