भगवान श्री कृष्ण की कहानियां (Krishna Stories In Hindi)

भगवान श्री कृष्ण की कहानियां (Krishna Stories In Hindi) एक और कहानियों के पोस्ट पर आप सभी का स्वागत है। कई सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें कृष्ण भगवान की कहानियां पढ़ना पसंद है यदि आपको भी कृष्ण भगवान की कहानियां पढ़ना पसंद है तब आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं।

छोटे बच्चे से लेकर बड़े सभी लोगों को कृष्ण भगवान की मजेदार और रोमांचक कहानी पढ़ना पसंद है, शायद आपको भी पसंद होगा यदि पसंद हैं,

तब आज का यह पोस्ट केवल आप सभी के लिए ही है आज के इस पोस्ट पर हम आप लोगों भगवान श्री कृष्ण की कहानियां (Krishna Stories In Hindi) के बारे में बताएंगे, जो आपको पसंद आएगा।

भगवान श्री कृष्ण की कहानियां (Krishna Stories In Hindi)

Krishna stories in Hindi [5+ कृष्ण भगवान की कहानियां]

केवल आज के समय में ही नहीं बल्कि पौराणिक समय से चला आ रहा है भगवान कृष्ण की कहानियां बहुत ही मजेदार और रोमांचक होता है इस वजह से छोटे बच्चे से लेकर बड़े सभी लोग Krishna Stories In Hindi कहानियां पढ़ना पसंद करते हैं। हमने भगवान श्री कृष्ण की कहानियां के बारे में बताएंगे वह है –  

1) भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की कहानी 

भगवान श्री कृष्ण और सुदामा एक ही गुरुकुल के छात्र थे दोनों एक दूसरे के बहुत ही अच्छे मित्र थे।बचपन में कृष्ण और सुदामा का दोस्ती इतना था कि वह दोनों एक दूसरे के बगैर रह नहीं सकते थे एक साथ खाना खाते थे एक साथ खेलते थे और अपना हर एक काम आपस में भाग कर लेते थे।

कृष्ण और सुदामा में बहुत दोस्ती था परंतु कुछ साल बाद वह लोग बड़े हो गए। कुछ समय बाद भगवान श्री कृष्णा द्वारका के राजा बने परंतु सुदामा का जीवन अच्छा नहीं बीत रहा था वह अपना जीवन को गरीबी में ही बता रहे थे। सुदामा की पत्नी ने सुदामा को 1 दिन कहा कि आप कहते हैं कि आपका दोस्त द्वारका के राजा है तब आप उनसे मदद क्यों नहीं लेते।

सुदामा ने बहुत सोचा और अपने पत्नी का बात सुनकर द्वारका के राजा या नहीं सुदामा के अच्छे मित्र भगवान श्री कृष्ण के पास जाने के बारे में सोचा परंतु वह यह सोचकर बहुत चिंतित थे कि वह कृष्ण को उपहार में क्या देंगे तभी सुदामा के पत्नी ने उनको एक मुट्ठी चावल दिया और इसे कृष्ण को देने को कहा।

सुदामा अपने पत्नी का दिया हुआ एक मुट्ठी चावल को लेकर भगवान श्री कृष्ण के पास चले गए भगवान श्री कृष्ण के महल के भीतर प्रवेश करने के समय सुदामा के पास दो सैनिक आते हैं और उन्हें कहते हैं कि आप कहां जाने के बारे में सोच रहे हैं तब सुदामा सैनिकों से डरते हुए कहते हैं कृष्णा मेरे परम मित्र हैं उनसे मिलने आया हूं।

सुदामा सोचते हैं कि कृष्ण तो अभी बहुत उच्च पद पर है क्या सुदामा को वह प्रवेश करने देंगे परंतु जैसे ही कृष्ण सुदामा के बारे में सुनते है वैसे ही कृष्णा खुद आकर सुदामा को अपने साथ ले जाते हैं और अपने हाथों से ही सुदामा का अच्छे से सेवा करते हैं यह देखकर सुदामा अंदर से बहुत खुश हो जाते हैं और कहते हैं कि कृष्ण से अच्छा मित्र कोई नहीं हो सकता।

सुदामा यह तो जान गए थे कि कृष्ण से अच्छा कोई मित्र नहीं है परंतु वह अपने पत्नी का दिया हुआ एक मुट्ठी चावल विष्णु को देने में डर रहे थे परंतु तभी कृष्ण सुदामा के पास से एक मुट्ठी चावल लेकर खा लेते हैं और कहते हैं कि इससे अच्छा उपहार कुछ नहीं हो सकता।

7 दिन बाद सुदामा अपने घर के तरफ जाते हैं और सोचते हैं की मैंने कृष्ण से काम के बारे में तो कुछ नहीं बात किया परंतु तभी देखते हैं कि उनका घर अब एक महल में बदल गया है और यह देखकर वह समझ जाते हैं कृष्णा कोई मामूली इंसान नहीं बल्कि वह एक बहुत ही शक्तिशाली और अच्छे इंसान है और उनसे अच्छा मित्र कोई नहीं हो सकता यह कहते हैं।

2) कृष्णा का पत्नी रुकमणी देवी की भरपाई की कहानी 

बस बहुत साल पहले की है जब भगवान श्री कृष्ण और उनकी पत्नी रुक्मणी का पुत्र का जन्म हुआ था। क्योंकि भगवान श्री कृष्ण के घर में एक छोटे से बच्चे का जन्म हुआ था इस वजह से घर पर बहुत उत्सव हो रहा था एक दिन रुकमणी कुछ काम के वजह से बाहर गई थी।

रुकमणी बाहर से जब घर की तरफ आती है तब देखती है कि उनका पुत्र नहीं है बहुत ढूंढने के बाद भी उनको उनका पुत्र नहीं मिलता तभी भगवान श्री कृष्णा प्रवेश करते हैं और अपने पत्नी से कहते हैं “रुकमणी तुम रो क्यों रहे हो” तब रुकमणी भगवान श्री कृष्ण से कहते हैं बहुत ढूंढने के बाद भी हमारा बच्चा कहीं मिल नहीं रहा है।

भगवान श्री कृष्ण का पुत्र खो गया है यह सुनकर श्री कृष्णा बहुत दुखी हो जाते हैं और कई जगह अपने पुत्र को ढूंढने लगते हैं परंतु उन्हें अपना पुत्र कहीं पर भी नहीं देखने को मिलता परंतु कुछ समय बाद नारद मुनि कृष्ण के घर आते हैं और रुक्मणी और श्री कृष्ण से कहते हैं आप लोग इतने चिंतित क्यों है।

नारद मुनि का बात सुनकर भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी कहते हैं कि हमें हमारा पुत्र नहीं मिल रहा है। नारद मुनि जब पूरे बात को सुनते हैं तब वह बहुत दुखी हो जाते हैं और तभी भगवान श्री कृष्ण नारद मुनि से आवेदन करते हैं कि वह उनके पुत्र को ढूंढ दे।

नारद मुनि भगवान श्री कृष्ण का बात सुनकर श्रीकृष्ण के पुत्र को ढूंढने को चले जाते हैं और सीमांधार स्वामी नाम के भगवान के पास जाते हैं जो किसी भी व्यक्ति का अतीत और भविष्य बता सकता है कभी सीमांधार स्वामी नारद मुनि को कहते हैं कि बहुत साल पहले रुकमणी एक ब्राह्मण महिला थी जो एक दिन जंगल में गई थी और उसे एक मयूर का बच्चा दिखा था।

तब वह ब्राह्मण महिला रुकमणी उस छोटे से मयूर के बच्चे को मां से बहुत दूर ले आया था छोटे से मयूर के बच्चे का मां बहुत दुखी हो गए और अपने बच्चे को इधर-उधर ढूंढने लगी कुछ दिन बाद मयूर को अपना बच्चा देखा और कभी मयूर रुकमणी से अपना बच्चा को मांगा परंतु रुक्मणी ने बच्चे को बेचारी मयूर को नहीं दिया।

छोटे बच्चे मयूर का मां प्रतिदिन खिड़की के सामने आकर अपना बच्चा को देखता था परंतु रुक मैंने उस छोटे से मयूर के बच्चे को मयंक को वापस नहीं लौट आता था 16 महीना बीत गया और तभी रुक्मणी का मन पिघल गया और मयूर के बच्चे को मयूर को वापस लौटा दिया।

और तब नारद मुनि ने पूछा तो इसके साथ रुक्मणी का पुत्र का क्या संपर्क है तब सीमांधार स्वामी ने बताया कि अभी रुकमणी को इस जन्म में पिछले जन्म का दंड मिल रहा है कृष्णा और रुक्मणी का बच्चा अभी सुरक्षित है परंतु उनको अपना बच्चा 16 साल बाद मिलेगा यह सुनकर नारद मुनि बहुत हैरान हो गए और इसी तरह इस कहानी का नाम पर गया रुकमणी देवी की भरपाई। 

3) भगवान श्री कृष्ण के सिक्का की कहानी

बात बहुत साल पहले की है जब एक साधु सभी लोगों को आशीर्वाद देकर पैसा लेता था भगवान श्री कृष्णा साधु को देखकर साधु के ऊपर एक छोटा सा परीक्षा लेने के बारे में सोचा। साधु 1 दिन नदी के किनारे से जा रहा था तभी उनको सोने से भरा हुआ एक बैग देखने को मिला।

सोने से भरा हुआ बैग को देखकर साधु ने लालच में आकर सभी सोने को अपने पास रख लिया जाते वक्त उनको एक भिखारी देखें परंतु साधु ने भिखारी को एक भी पैसा नहीं दीया जब साधु घर के किनारे में बढ़ रहे थे तभी उनको चमकाता हुआ हीरे जैसा एक पत्थर दिखाओ तब वह सोने के सिक्के से भरा हुआ बैग को एक किनारे पर रखा और हीरा को लेने गया तभी एक छोरा कर उनके सभी सोने के सिक्के को चोरी कर लिया।

सोने का सभी सिक्का चोरी तो हो ही गया उसी के साथ साधु ने जिस पत्थर को हीरा समझा था वह पत्थर असल में एक छोटा सा कांच का टुकड़ा है तभी साधु समझ गए कि उनके साथ कुछ अच्छा नहीं हो रहा है तभी अचानक से भगवान श्री कृष्ण प्रकट होते हैं और साधु से कहते हैं।

तुमको जब सोने से भरा हुआ एक बैग मिला तब तुमने एक भी सिक्का को भिखारी को क्यों नहीं दिया साधु ने श्रीकृष्ण से डरते हुए कहा कि मुझसे बहुत बड़ा पाप हो गया मैं समझ गया कि लालच अच्छा नहीं है इस वजह से मैं कभी भी ऐसा लालच नहीं करूंगा तब भगवान श्री कृष्णा खुशी में आकर साधु को सोने के सिक्के से भरा हुआ बैग दे देता है। 

4) कृष्ण और शिशुपाल की कहानी

भगवान श्री कृष्ण को शिशुपाल एकदम पसंद नहीं करते थे शिशुपाल हमेशा भगवान श्री कृष्ण का अपमान करते थे 1 दिन भगवान कृष्ण के सभी मित्र शिशुपाल को मारने गए परंतु भगवान श्री कृष्ण ने सभी को रोक लिया।

कुछ दिन बात शिशुपाल के माथे ने कृष्ण को शिशुपाल को समाप्त कर देने का आवेदन किया था भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि मैं शिशुपाल का 99 अपराध को सह लूंगा परंतु यदि वह एक सौ अपराध पूरे करता है तब मैं उसे नहीं छोडूंगा कब शिशुपाल का मां खुशी हो कर चली जाती है।

कुछ दिन बाद कृष्णा और उनके सभी मित्र के साथ शिशुपाल भी बैठे थे तब शिशुपाल ने अचानक भगवान श्री कृष्ण को बुरा भला कह दिया और कहा कि तुम्हारा 99 अपराध पूरा हो गया है अब मैं तुम्हारा और कोई अपराध को नहीं सहन करूंगा परंतु शिशुपाल ने भगवान श्रीकृष्ण का एक भी बात को नहीं सुना।

भगवान श्री कृष्ण शिशुपाल को कह दिया कि तुमने 100 अपराध पूरा कर लिया है अब तुम्हें धन से कोई नहीं बचा सकता तब भगवान श्री कृष्ण प्रार्थना करने लगे और अपने सुदर्शन चक्र को शिशुपाल के पीछे छोड़ दिए शिशुपाल डरते हुए समुंदर में डूब गए परंतु सुदर्शन चक्र ने उनका सिर को काट दिया। 

5) कृष्ण मखन चोर की कहानी

भगवान श्री कृष्ण को मक्खन खाना बहुत पसंद था वह हर वक्त घर के सभी मक्खन को चट कर जाते थे केवल अपने घर के ही नहीं बल्कि वृंदावन के सभी लोगों के घर से मक्खन चुराते थे इस वजह से भगवान श्री कृष्ण को माखन चोर भी कहा जाता है।

एक दिन भगवान श्री कृष्ण के माता यशोदा कृष्ण को घर पर छोड़ कर किसी काम के वजह से बाहर गए थे तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सभी मित्रों को बुलाकर सभी का मदद से मटके के ऊपर पहुंचा और सभी मक्खन के मटके को तोड़ दिया और मक्खन खाने लगे

जब यशोदा माता अचानक घर पर चले आए तब सभी कृष्ण के मित्र वहां से भाग गए परंतु भगवान श्री कृष्णा मक्खन खाने में व्यस्त था बाद में भगवान श्री कृष्ण को माता से बहुत दांत पड़ा और भगवान कृष्ण को यशोदा मां ने घर पर एक कपड़े से बांध दिया और इसी से समझा जा सकता है कि भगवान श्री कृष्ण मखन के कितने बड़े चोर थे।

आशा करता हूं कि आप सभी को Krishna Stories In Hindi | कृष्ण भगवान की कहानियां यह पोस्ट बहुत पसंद आया होगा। यदि आप और मजेदार और दिल जीत लेने वाले भगवान श्री कृष्ण की कहानियां आर्टिकल पढ़ना चाहते हैं तब नीचे कमेंट कर दीजिएगा।

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