90+ Kuposhan Slogan In Hindi (कुपोषण पर नारे)


90+ Kuposhan Slogan In Hindi (कुपोषण पर नारे) कुपोषण ऐसी बीमारी है जिसके उपाय एवम कारण साधारण दिखाई पड़ते है। परंतु इसका समाधान हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है, क्योंकि समाज में हर परिवार के हालात अलग होते हैं इसी कारण विभिन्न परिवारों के लिए इन समस्याओं का हल निकाल पाना बिल्कुल भी संभव नहीं रहता।

कुछ ऐसे लोग इस बीमारी के शिकार होते हैं जिनका परिवार अत्यधिक पिछड़ने के कारण दो वक्त की रोटी ढंग से नहीं खा पाता, नियमित रूप से भोजन न मिल पाने के कारण आज समाज में बड़ी संख्या में लोग कुपोषण का शिकार बन जाते हैं। सामजिक स्थिति के कारण होने वाली समस्याएं- कुपोषण होने का मुख्य कारण सिर्फ भोजन की कमी नहीं है, बल्कि कई बार समाज में व्याप्त घातक बीमारियों के संपर्क में आने से भी एक व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो सकता है।

कुपोषण सिर्फ तन में नहीं है मन में ज्यादा है आजकल।

जब बच्चों का होगा पौष्टिक खानपान, तभी तो बच्चे ऊँचा करेंगे भारत का नाम.

हर बच्चे में इक भारत होता है, फिर वो क्यों कुपोषण से रोता है.

या फिर समाज में आय के आधार पर होने वाला वर्गीकरण भी इसकी मुख्य वजह हो सकता है। ऐसी स्तिथि में समाज के एक तरफा परिवारों को अत्यधिक पोषण मिलता है और दूसरी तरफ अच्छा पोषण नहीं मिल पाने के कारण अन्य लोग कुपोषण के शिकार बन जाते हैं। भुखमरी कुपोषण का हिस्सा- विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुमानों के अनुसार विश्व में 1.02 मिलियन लोग प्रति वर्ष कुपोषण और भुखमरी के शिकार होते हैं। इसका मतलब यह है, कि हर स्थान पर 6 लोगों में से एक व्यक्ति को संपूर्ण रूप से पोषण नहीं मिलता।


वह व्यक्ति अपनी आवश्यकता के अनुसार भोजन नहीं खा पाता। इसीलिए कुपोषण के अधिकतर मामलों में भुखमरी का सबसे ऊपर स्थान रहता है। कुछ वर्ष पहले देश की आर्थिक प्रगति में बहुत सारी रुकावटें देखने को मिलती थी जो सिर्फ भुखमरी के नतीजे थे।आवश्यक पोषक तत्वों की कमी के कारण भुखमरी ,कुपोषण का मुख्य कारण बनता है कुपोषण के कारण स्वस्थ व्यक्ति को भी बहुत सारे दुष्प्रभावो को झेलना पड़ता है |

कुपोषण के कारण होने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ- सिर्फ कुपोषण सभी बीमारियों का कारण नहीं है फिर भी कुपोषण जैसी महान बीमारी के कारण लोगों को अत्यधिक लंबे समय तक उन समस्याओं का सामना करना पड़ता है और फिर अंत में मौत की नींद सोने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके लक्षण सिर्फ उन्हीं लोगों को नहीं दिखते, जो इस रोग से प्रभावित हैं बल्कि उनके साथ रहने वाले अन्य लोगों को भी अत्यधिक दुखों को सहन करना पड़ता है|

Kuposhan Slogan In Hindi (कुपोषण पर स्लोगन)

30+ Kuposhan Slogan In Hindi (कुपोषण पर स्लोगन) उन लोगों को भी कुपोषण की बीमारी हो सकती है जो लोग अपने उपयुक्त पोषण में विटामिन, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन की उचित मात्रा को ग्रहण नहीं करते। ज्यादातर कुपोषण उन लोगों को होता है जो अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट वसा और प्रोटीन का उचित मात्रा का सेवन नहीं करते। वास्तविक तौर पर कुपोषण का मुख्य कारण भोजन की कमी रहती है ।लोगों को उचित उम्र में उचित आहार न मिल पाने के कारण, बाद में कुपोषण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

कुपोषण के कारण शरीर का क्षय- जब भी व्यक्ति का शरीर क्षय होता है तो सबसे पहले कंकाल तंत्र धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है तथा धीरे-धीरे यह बीमारी क्वाशियोरकोर नाम की एक खतरनाक बीमारी में बदल जाती है जिसके कारण संपूर्ण शरीर में सूजन होने लगता है और चेहरा भी काफी मोटा हो जाता है इस प्रकार के चेहरे को मून फेस भी कहते हैं।

अतः कुपोषण की बीमारी हमारे लिए अत्यधिक घातक साबित होती हैं जब भी शरीर में विटामिन और खनिज तत्वों की कमी होती है तो एनीमिया स्कर्वी ,पोलियो तथा बेरी – बेरी आदि रोगों का समावेश शरीर में होने लगता है। कुपोषण के मुख्य कारणों में आयोडीन की कमी होना भी है क्योंकि इसकी कमी होने पर मानसिक विकृति और दिमागी बीमारियां सबसे पहले पनपती हैं।

संसार में लगभग 780 मिलियन लोगों को आयोडीन की कमी है इसके कारण आयोडीन संबंधित विभिन्न प्रकार के रोग लोगों को अपना शिकार बनाते हैं तथा इसका सबसे बुरा प्रभाव सीधे दिमाग पर पड़ता है जोकि आयोडीन की कमी के बिना कभी विकसित नहीं हो पाता। हमने Kuposhan Slogan In Hindi पर जो Kuposhan Slogan लिखा है, बह स्लोगन्स है –

मैं तो हवा हूँ उड़ जाउंगी, मैं पानी हूँ सूख जाऊंगा मैं तो ख़ुशबू हूँ उड़नछू हो जाउंगी, मैं स्वाद हूँ फीका हो जाऊंगा, मगर ऐ इंसानी लिंग क्या रह पायेगा मुझ बिन, मैं हूँ सृष्टि परियावरण मेरा पोषण

ऐ मनुष्य तू है अभी नवजात शिशु और मेरी कोख मे है तेरी आने वाली पिढ़िया, तू मेरा पोषण नष्ट कर अपना जीवन और आने वाली तेरी पीढ़ियों का सर्वनाश कर रहा है ऐ मनुष्य सब इस तरहा नष्ट कर तब तू क्या करेगा, मेरा क्या

मैं तो हवा हूँ उड़ जाउंगी पानी हूँ सूख जाऊंगा खुशबू हूँ उड़नछू हो जाउंगी स्वाद हूँ फीका हो जाऊंगा

कुपोषण सिर्फ तन में नहीं है मन में ज्यादा है आजकल।

जब बच्चों का होगा पौष्टिक खानपान, तभी तो बच्चे ऊँचा करेंगे भारत का नाम.

हर बच्चे में इक भारत होता है, फिर वो क्यों कुपोषण से रोता है.

अपने बच्चों को खूब करें प्यार, मगर दे घर का बना पौष्टिक आहार।

बच्चों को पौष्टिक आहार देना है जरूरी, बाजार की हानिकारक चीजों से बनाये

घर पर खाना इतना पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाये, बच्चे जब भी बाहर कुछ खाये तो उन्हें पसंद ना आये.

वही बच्चे सफल हो पाएंगे, जो पौष्टिक भोजन खाएंगे।

अपने बच्चों को पौष्टिक आहार खिलाएं, आपको राष्ट्रीय पोषण दिवस की शुभकामनाएं।

बच्चों को खाने में पोषक तत्व मिले, वे स्वस्थ्य रहे और चेहरा खिले।

स्वस्थ संतुलित हो आहार, एनर्जी दे शरीर को अपार।

स्वास्थ ही असली सोना हैं, जो स्वस्थ नहीं उसे जीवन भर रोना हैं.

स्वस्थ आहार का सेवन करें, शरीर को सेहतमंद रखें ।

तन को तुम बलवान बनाओं, जंक फ़ूड को दूर हटाओं.

जैसा हो व्यक्ति का आहार, वैसा ही हो उसका विचार ।

हेल्थ को दे पहले स्थान, तभी होगा बिमारियों का निदान

अब हर किसी से यही कहना, स्वस्थ रहना व सुखी रहना!

हाई कैलोरी भोजन लें, पर व्यायाम करना न भूलें ।

सुबह सवेरे भागों – कूदो, अपना स्वास्थ्य बनाओ, जंक फ़ूड को दूर भगाओ।

घर का आहार अमृत समान, यह स्वास्थ के लिए है वरदान.


स्वस्थ रहना है मेरी कर्मपूजा इससे बढ़कर है काम न दूजा

कर्म है हर मनुष्य का कर्तव्य, स्वस्थ हो तभी प्राप्त करेगा लक्ष्य ।

स्वस्थ शरीर की जिसने ठानी, यही बेहतर जीवन की निशानी

बाहर का भोजन कम करें, घर का भोजन ग्रहण करें।

फल, सब्जी और अनाज का सेवन बढायें, फ़ास्ट फ़ूड से बचें और शरीर को स्वस्थ बनायें.

कुपोषण के लक्षण और कुपोषण की पहचान

यदि कुपोषण के प्रारंभिक लक्षणों को देखकर ही इसका सही उपाय किया जाए तो इससे होने वाली समस्याओं को कम किया जा सकता है। इसे पहचानने के लिए एम यू एस टी प्रमुख है यहा कुपोषण से ग्रस्त व्यक्ति को पहचानने के लिए 5 चरणों में कार्य करता है |

प्रथम चरण:

व्यक्ति का वजन व लंबाई को नाप कर बॉडी का मांस इंडेक्स निकाल कर उसका स्कोर देखता है।

दूसरा चरण:


बिना किसी वजह से व्यक्ति का वजन कम होना। इसे नोट कर के और त्वचा को देखकर पता लगाया जाता है।

तीसरा चरण :

व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्थितियों को देखकर यह पता लगाया जाता है व्यक्ति में कहीं कुपोषण के गुण तो नहीं है।

चतुर्थ चरण:

चौथे चरण में तीनों चरणों के स्कोर को जोड़ कर रिस्क स्कोर निकाला जाता है।

पांचवा चरण:

पांचवें चरण में यदि स्कोर जीरो है तो व्यक्ति को कुपोषण होने का कोई भी खतरा नहीं होता यदि इससे बढ़कर है तो उसे कुपोषण होने की संभावनाएं रहती है। यदि प्रारंभिक लक्षण को ही पहचान कर समय पर कुपोषण रहित व्यक्ति को अच्छा पोषण दिया जाए तो वह इस समस्या से बहुत जल्दी छुटकारा पा सकता है ।

कुपोषण का उपचार

एनी यूएसटी की सहायता से जब हमें प्रारंभिक कुपोषण के लक्षण नजर आते हैं तो हमें तुरंत ही वक्त के हिसाब व जरूरत को देखकर उपयुक्त पोषण वाला आहार ग्रहण करना चाहिए यदि हो तो हमें घर पर भोजन का सेवन करना चाहिए यदि मात्रा के ऊपर हो तो हम अस्पताल में जाकर अच्छे भोजन के साथ ही दवाइयां भी खानी चाहिए। जिसके कारण हम बहुत जल्द अपनी प्रारंभ की स्थिति में आ सकते हैं|

कुपोषण होने पर इसका उपचार भी कुपोषण के प्रकार पर निर्भर करता है यानी कुपोषण का प्रत्येक हाल में इलाज संभव है यदि किसी को कुपोषण गंभीर अवस्था तक भी हो तो उसे पोषण आहार वक्त से पहले खिलाकर ठीक किया जा सकता है।

इसके लिए हमें अपने प्रतिदिन के आहार में कुछ परिवर्तन लाने पड़ते हैं और संतुलित पर्याप्त पोषक तत्वों का सेवन करके कैलोरी युक्त पदार्थों का इस्तेमाल करके तथा रेडी टू यूज़ फुट का उपयोग करके कुपोषण जैसी बीमारी का बड़ी आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। रेडी टू यूज फूड का उपयोग बच्चों को भी कुपोषण से बचाने के लिए किया जाता है।

उम्मीद है की आपको Kuposhan Slogan In Hindi | Kuposhan Par Slogan | कुपोषण पर नारे से जुड़ी सभी जानकारी मिल चुकी होगी।


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