ओशो पर भाषण – Osho Speech In Hindi

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दोस्तों अगर आप ओशो पर भाषण या Osho Speech धूँड रहे हो तो आज इस पोस्ट में हम Osho Rajneesh के भाषण या ओशो पर भाषण – Osho Speech In Hindi के बारे में जानिंगे।

विवादास्पद रहस्यवादी गुरु एवं आध्यात्मिक शिक्षक के तौर पर अपना जीवन जीने वाले ओशो भारत समेत अमेरिका तथा विश्व के अन्य देशों में भी एक प्रसिद्ध सार्वजनिक वक्त थे जिन्हें अपने निष्पक्ष विचारों एवं प्रवचनों के लिए जाना जाता है।

अक्सर लोगों को ओशो के बारे में कहीं पढ़ने तथा सुनने को मिलता है। लेकिन काफी कम लोग उनके जीवन को करीब से जानते हैं अतः इस लेख के माध्यम से हमारा प्रयास ओशो के जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां आपके साथ साझा करना है।


यहां इस लेख में हम आपको ओशो के जीवन पर लिखी गई कुछ Speeche उपलब्ध करा रहे हैं आप भी ओशो के बारे में और अधिक विस्तार से जानना चाहते हैं या किसी मंच से ओशो के बारे में आपको बोलने का अवसर मिला है तो फिर इस आर्टिकल में दिए गए भाषण आपके इस कार्य में सहायता करेंगे तो आइए इस लेख की शुरुआत करते हैं.

ओशो पर भाषण – Osho Speech In Hindi

भाषण 1 (Short Speech On Osho In Hindi)

ओशो जिन्हें उनके प्रेरक विचारों की वजह से उनके अनुयाई भगवान श्री रजनीश कह कर बुलाते थे। वे भारत समेत विश्व के अनेक देशों में एक करिश्माई आध्यात्मिक लीडर माने जाते थे! काफी समय तक अमेरिका में रहकर उनके लाखों अनुयाई बने, जहां उन्होंने उच्च शैली का जीवन व्यतीत किया।

ओशो का जन्म वर्ष 1931 में हुआ था। ओशो   जैन परिवार में पैदा हुए थे परंतु ओशो एक धर्म मैं विश्वास करने की जगह विभिन्न धर्म हिंदू क्रिश्चियन जैन के तत्त्वों पर भरोसा करते थे !उनका मानना था कि भगवान हर जगह मौजूद हैं सभी प्राणियों में भगवान मौजूद हैं।

अपने जीवन काल के दौरान उन्होंने आध्यात्म के क्षेत्र में पूरे विश्व में लोगों के सोचने के नजरिए में परिवर्तन लाने का कार्य किया। वे एक शानदार वक्ता थे मंच से लाखों लोग उनकी बातें,विचारों को सुनना पसंद करते थे. माना जाता है अध्यात्म से प्रेरित होकर ओशो को मात्र 21 वर्ष की आयु में ही आत्म ज्ञान प्राप्त हो चुका था। बाद में उन्होंने अपने ज्ञान को दर्शन के एक शिक्षक के रूप में जबलपुर यूनिवर्सिटी में 9 वर्षों तक पढ़ाया।

वर्ष 1966 तक एक शिक्षक के तौर पर उनका जीवन चल रहा था लेकिन इसके बाद का जीवनकाल उन्होंने एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में बिताने का फैसला लिया। अध्यात्म के विषय पर उनकी बेबाक बातें लोगों मैं सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करती थी तो वहीं कई बार अपनी फिलॉसफी से उनकी बातें लोगों को असमंजस में डाल देती थी इसलिए विवादों से भी भी ओशो का नाता रहा।

ओशो ने नए प्रकार के ध्यान की खोज की इस ध्यान प्रक्रिया के दौरान मनुष्य अपने वर्तमान भविष्य या उससे जुड़ी सभी चीजों को भुलाकर ध्यान में लीन हो सकता है। ओशो आप्रवासन, कानून, विवाह, संभोग जैसे विषयों पर खुलकर अक्सर बोलते थे। निजी जिंदगी की बात करें तो माना जाता है अपने जीवन काल के दौरान ओशो को कार बहुत पसंद थी उनके पास कई लगज़री गाड़ियां थी।

वर्ष 1974 में ओशो भारत के पुणे शहर में आ गये और यही उन्होंने 6 एकड़ की भूमि में एक आश्रम की स्थापना की। और भारतीय लोगों को अपने आध्यात्मिक जीवन एवं अनुभव का ज्ञान बांटने का कार्य किया परंतु धर्म एवं अध्यात्म के विषय पर की गई टिप्पणी को अपमानजनक समझने की वजह से वर्ष 1980 से कुछ हिन्दू कट्टरपंथियों ने उन पर हमला कर दिया।

अगले कुछ वर्षों में तबीयत में खराबी की वजह से ओशो ने भारत छोड़कर अमेरिका जाने का फैसला किया था ताकि वहां उन्हें बेहतर मेडिकल सुविधा मिल सके! वहां भी ओशो ने आश्रम हेतु बड़ी मात्रा में भूमि खरीदी। आगे चलकर उन्होंने अपना नाम रजनीश से ओशो रख लिया। इस शब्द के पीछे कई लोगों की विभिन्न मान्यता है कि कुछ मानते थे Osho एक जापानी शब्द है तो दूसरी तरफ कई लोग कहते हैं oceanic experience अर्थात ज्ञान की वजह से रखा गया है।

वर्ष 1990 में रहस्यमई तरीके से ओशो की मृत्यु हो गई और मौत की वजह दिल का दौरा बताई गई. लेकिन उनके कई अनुयाईओं का यह भी मानना है कि उन्हें सीबीआई द्वारा जहर दे दिया गया हालांकि यह सारी बातें इस बात की तरफ पुख्ता सबूत पेश नहीं करती हैं।

भाषण 2 (Medium Speech On Osho In Hindi)

यहां उपस्थित सभी लोगों को मेरा नमस्कार आज मैं यहां इस मौके पर विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु ओशो के बारे में आपके समक्ष एक लघु भाषण सुनाने जा रहा हूं।

ओशो का जन्म वर्ष 1931 में मध्य प्रदेश की कुचवाड़ा गांव में हुआ था उनका मूल नाम चंद्र मोहन जैन था बाद में उन्हें रजनीश कहकर बुलाया जाने लगा! उन्होंने भारतीय समाज में धर्म के प्रति लोगों में फैली रूढ़िवादी विचारधारा के खिलाफ तथा ध्यान के प्रति लोगों को जागरूक किया। उनके विचार या कहें पढ़ाने का अंदाज पश्चिमी संस्कृति के लोगों को खूब पसंद आया।

इसलिए भारत ही नहीं अपितु अमेरिका में उनके आध्यात्मिक ज्ञान एवं ज्ञान से प्रभावित होकर नई पीढ़ी के लाखों अनुयाई बन गए। रजनीश के अनुसार 7 सालों तक वे अपने दादा दादी के पास रहे और उनके अनुसार उनकी दादी ने हमेशा से उन्हें एक स्वतंत्र वातावरण में रहने केलिए तैयार किया उन्हें किसी भी तरह की रोक टोक एवं कभी भी पारंपरिक शिक्षा पूरी करने के लिए मजबुर नहीं किया गया।

दादा दादी के निधन के बाद रजनीश मध्यप्रदेश में अपने घर माता पिता के वहां आकर बस गए। माना जाता है स्कूली शिक्षा के दौरान वे एक मेघावी छात्र होने के साथ-साथ एक अच्छे debater थे। आने वाले सालों में मंच से विभिन्न विषयों में सार्वजनिक रूप से बोलने की उनकी कला इस कथन को सच भी साबित करती है। माना जाता है कि 21 वर्ष की आयु में ओशो ने आत्मज्ञान प्राप्त किया, शादी करने m माता-पिता की राय से ओशो सहमत नहीं हुए इसलिए पूरे जीवन वे अविवाहित रहे।

कॉलेज शिक्षा के दौरान दर्शन का अध्ययन करने के बजाय उन्होंने जबलपुर के विश्वविद्यालय से ही छात्रों को फिलॉसफी (दर्शन) के विषय पर पढ़ाया! अनेक वर्षों तक बतौर शिक्षक उन्होंने अपनी सेवाएं दी लेकिन वर्ष 1966 में उन्होंने अपना पूरा ध्यान एक आध्यात्मिक गुरु के तौर पर लगा दिया।

वर्ष 1969 में दूसरे विश्व हिन्दू सम्मेलन में उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि सच्चा धर्म वही है जो सुखी से जीवन जीना सिखाए। वर्ष 1970 तक आते-आते ओशो ने सार्वजनिक वक्ता के तौर पर अपने धार्मिक प्रवचन से लोगों के सोचने के तरीके को प्रभावित पर अपने मिशन का विस्तार किया। 1970 में Woodland अपार्टमेंट में वे शिफ्ट हो गए ताकि वे एक स्थान पर रहकर ही लोगों तक अपने लेक्चर पहुंचा पाए।

वर्ष 1971 में उनके अनुयाईयों द्वारा उन्हें भगवान श्री रजनीश की उपाधि दी गई  वर्ष 1974 में उन्होंने अपने अनुयायियों के लिए आश्रम की स्थापना की। जिसे Osho International Meditation Resort के नाम से आज हम जानते हैं। यहां वे वर्ष 1981 तक रहे

तत्पश्चात वर्ष 1981 में वे अमेरिका आ गए जहां उनके भाषणों को सुनकर बड़ी संख्या में वहां उनके अनुयाई बन गए। रजनीश का मानना था कि आध्यात्मिकता का वास्तविक मूल्य आपकी गरीबी से नहीं हो सकता और इस कथन को सही साबित करने के लिए स्वयं खुद ओशो उच्च स्तर की जीवनशैली अपनाने थे वे रोजाना लग्जरी कपड़े, घड़ियां और गाड़ियों पर सवार होते थे।

कई वर्ष अमेरिका में गुजारने के बाद अपने धार्मिक प्रवचन एवं ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने के बाद वर्ष 1987 में उन्हें दी गई भगवान श्री रजनीश की उपाधि बदलकर नाम ओशो रख दिया। अप्रैल 1979 में उनकी आखिरी स्पीच लोगों द्वारा सुनी गई और 19 जनवरी 1990 को इस प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई! मौत की वजह आज भी अनसुलझी रह गई है।

भाषण 3 (Long Speech On Osho In Hindi)

यहां उपस्थित सभी लोगों को मेरा नमस्कार! आज मैं यहां इस मौके पर आपके समक्ष ओशो के जीवन से संबंधित एक speech  लेकर हाजिर हूं।

मनुष्य को किसी से भी किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता नहीं है आप जो हैं सही है खुद को स्वीकार करना सीखें ~ ओशो

मानव जीवन, धार्मिक रूढ़िवादिता एवं आध्यात्मिक विषय पर सार्वजनिक रूप से अपने विचारों को रखने वाले ओशो के बचपन का नाम चंद्रमोहन था उनका जन्म एक जैन परिवार में जन्म हुआ था। जनमानस को अपने विचारों एवं ज्ञान से प्रभावित कर उनके अनुयायियों द्वारा ओशो को भगवान श्री रजनीश के नाम से भी बुलाया जाता है।

ओशो का जन्म भारत के मध्य प्रदेश राज्य के जिले के कुचवाड़ा गांव में हुआ। ओशो बचपन से ही गंभीर एवं सरल स्वभाव के थे कहां जाता है स्कूली शिक्षा के दौरान वे एक विरोधी प्रवृत्ति के छात्र थे जिन्हें पारंपरिक तरीके, रूढ़िवादी विचारधारा पसंद नहीं आती थी।

इसीलिए स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद किशोरावस्था में ओशो एक नास्तिक व्यक्ति बन चुके थे! ईश्वर एवं धार्मिक चीजों में उनकी बिल्कुल भी रुचि नहीं थी। वे स्वयं को नास्तिक मानते थे। स्कूली शिक्षा से ही वे एक कुशल वक्ता बनने की कोशिश करते थे और भविष्य में वे इसमें सफल भी हुए उन्होंने अपनी आवाज से लाखों करोड़ों लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया।

आगे चलकर उन्होंने एक अध्यापक के रूप में अपने सेवाएं दी दर्शनशास्त्र के लेक्चरर के रूप में उन्होंने विश्व विद्यालयों में छात्रों को पढ़ाया।  जिस वजह से उन्हें आचार्य रजनीश कहकर बुलाया जाने लगा। वर्ष 1962 में उन्होंने अपनी नौकरी त्यागकर अपना ध्यान अध्यात्म की ओर लगाया और लोगों को भी इसके प्रति आकृष्ट किया। कहा जाता है उन्होंने विभिन्न धर्मों जैसे हिंदू मुस्लिम,सिक्ख पर जनता को प्रवचन दिए। उनके महान वचनों ने कई लोगों को काफी प्रभावित किया और कई लोग उनके अनुयाई भी बन गए।

धर्मों के अलावा वे कबीरदास, रविंद्रनाथ टैगोर, गौतम बुद्ध जैसे महापुरुषों के जीवन पर भी प्रवचन देते थे। उन्होंने भारत के विभिन्न स्थानों पर जाकर उस समय गांधीवाद और समाजवाद के बारे में जोर शोर से अपनी विचारधारा को लोगों के सामने रखा। 1960 में उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया वे समाजवाद एवं गांधीवादी विचारधारा के कटु आलोचक थे! उन्होंने कई भाषणों के दौरान इसकी घोर आलोचना भी की थी जिससे वे एक मुख्य विवादास्पद व्यक्ति बन चुके थे!

इसके अलावा मानव जीवन में कामुकता के विषय पर वे स्वतंत्र दृष्टिकोण पसंद करते थे और अक्सर इस विषय पर खुलकर अपने विचारों को रखते थे। उनके इन विचारों से शुरुआत में उन्हें लोगों की तरफ से नाराजगी का भी सामना करना पड़ा लेकिन बाद में उन्हें इसके लिए स्वीकार भी किया गया।

1960 के दशक में वे भारत में एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु के रूप में जाने जाते थे! जिन्होंने आम जिंदगी छोड़कर अध्यात्म पर अपना जीवन समर्पित कर दिया। ओशो ने अपने जीवनकाल के दौरान सैकड़ों पुस्तकें पढ़ी लेकिन उनमें से कई किताबें खूब विवादास्पद भी रही जिसके प्रति जनता ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की

उनकी एक पुस्तक “संभोग से समाधि की ओर”  काफी चर्चा में आई जिसे काफी विवादों का भी सामना करना पड़ा। ओशो ने अपने जीवन काल के दौरान हजारों पर प्रवचन दिए। उनके अनुयायियों उनके द्वारा दिए गए प्रवचनों को कैसेट्स ऑडियो वीडियो के माध्यम से सुनते हैं ओशो के कुछ सुप्रसिद्ध प्रवचन इस प्रकार हैं।


• यदि आप असल में सत्य देखना चाहते हैं तो आप अपनी सहमति में भी अपनी राय ना रखें और ना ही अपनी असहमति पर
• प्रश्न यह नहीं होता कि कितना सीखा जा सकता है बल्कि यह उठता है कि कितना भुलाया जा सकता है।
• दोस्ती एक शुद्ध प्रेम है जिसमें निस्वार्थ भाव होता है इसमें न तो कुछ मांगा जाता है नहीं इस में कोई शर्त होती है इसमें बस देने में आनंद आता है।
• जहां तक प्रेम का संबंध है जिसमें आप दिवालिया नहीं हो सकते आप चाहे कितनी भी लोगों से प्रेम कर लें आप कभी यह नहीं कहेंगे  अब मेरे पास प्रेम शेष नहीं है जहां तक प्रेम का प्रश्न है आप इसमें कभी दिवालिया नहीं हो पाएंगे।

वर्ष 1970 तक उन्हें जहां आचार्य रजनीश कहकर बुलाया जाता था वही प्रत्येक प्राणी के प्रति उनके विचारों, सोच से प्रभावित होकर उन्के अनुयायियों द्वारा उन्हें भगवान रजनीश भी कहा जाने लगा।


वर्ष 1981 में ओशो अपने साथियों के साथ अमेरिका गए और वहां जाकर उन्होंने रजनीश पुरम की स्थापना की लेकिन कहा जाता है कुछ गैर कानूनी हरकतों का संदेह होने की वजह से अमेरिकी सरकार द्वारा ओशो को तथा उनके शिष्यों को वहां से जाने के लिए विवश कर दिया।तत्पश्चात ओशो एक बार फिर से अपने देश भारत लौट आए और यही उन्होंने अपने अनुयायियों को ज्ञान की शिक्षा देना प्रारंभ कर दिया।

19 जनवरी 1990 की अंतिम तारीख थी जब उन्होंने इस पृथ्वी को अलविदा कह दिया। इस खबर को सुनकर बड़ी संख्या में उनके अनुयायियों को गहरा दुख पहुंचा। परंतु मानव जीवन को सफल बनाने, ज्ञान की राह दिखाने के लिए उनके अनुयायियों द्वारा उन्हें आज भी याद किया जाता है और सर्वथा याद किया जाता रहेगा।

उम्मीद है की अब आप Osho Rajneesh के भाषण या ओशो पर भाषण – Osho Speech In Hindi के बारे में काफ़ी कुछ जान गये होगे।

उम्मीद है की आपको ओशो पर भाषण – Osho Speech In Hindi! का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।


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