प्रदूषण पर भाषण – Pollution Speech In Hindi

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दोस्तों अगर आप जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण या फिर किसी भी तरह के प्रदूषण पर भाषण धूँड रहे हो तो आप बिलकुल सही जगह आए हो क्यूकी आज इस पोस्ट में हम प्रदूषण पर भाषण (Pollution Speech In Hindi) 2 minute short and long speech on air & water in hindi के बारे में जानिंगे।

स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है शुद्ध हवा एवम जल परंतु जीवन की यह दोनों मूलभूत आवश्यकताएं प्रदूषित होती जा रही हैं तो क्या ऐसे में मनुष्य का जीवन स्वास्थ्य वर्धक हो सकता है? आपका जवाब होगा नहीं! लेकिन न जाने क्यों प्रदूषण जैसे इस गंभीर विषय पर ना सरकार चिंतित है और ना ही देश की जनता देश में बढ़ता प्रदूषण इस बात का स्पष्ट प्रमाण देता है।

नमस्कार यदि आपको पॉल्यूशन जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे पर अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया गया है, तो आज हम आपके लिए इस लेख में लेकर आए हैं प्रदूषण पर भाषण – Pollution Speech In Hindi.


इस लेख में आपको प्रदूषण के कुछ भाषणों का वर्णन देखने को मिलेगा। जिससे आप अपने लिए इस टॉपिक पर एक शानदार स्पीच तैयार कर पाएंगे। और इसे अपने स्कूल, कॉलेज की कक्षा या किसी अन्य आयोजन पर सुना सकते हैं तो आइए आर्टिकल की शुरुआत करते हैं।


प्रदूषण पर भाषण – Pollution Speech In Hindi

भाषण 1 (Long Speech On Pollution In Hindi)

सभी को सुप्रभात मेरा नाम… मैं कक्षा में पढ़ता/पढ़ती  हूं! आज मैं इस मौके पर आपके समक्ष प्रदूषण के विषय पर भाषण देकर अपने विचार प्रकट करना चाहता हूं।

साथियों मानव जीवन के स्वास्थ्य के लिए सबसे गंभीर समस्या के रूप में प्रदूषण उभरकर सामने आया है! विश्व में अधिकतर देश आज प्रदूषण की समस्या का सामना कर रहे हैं और इस चुनौतीपूर्ण पर्यावरणीय समस्या से बचने का निदान ढूंढ रहे हैं। खतरनाक एवं विषैले पदार्थ जब वातावरण में अपना प्रभाव  डालते हैं तो प्रदूषण उत्पन्न होता है! यह प्रदूषण विभिन्न प्रकार का हो सकता है जैसे जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण इत्यादि।

वातावरण में जितनी अधिक प्रदूषण की मात्रा बढ़ती है यह मनुष्य के अलावा पर्यावरण में रहने वाले वन्य जीव के लिए भी खतरनाक साबित होती है।

रासायनिक फैक्ट्रियों, कारखाना तथा वाहनों से निकला धुंआ  जब वायु के साथ मिलाप करता है तो वायु प्रदूषण का जन्म होता है। और जब यह वायु एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचकर प्राणी के शरीर तक पहुंचती है तो वह वायु प्रदूषण का शिकार हो जाता है। जिससे शरीर में विभिन्न प्रकार के रोगों का जन्म होता है और समय के साथ जितना प्रदूषण उसके शरीर में फैलता है उसके अधिक भयंकर नुकसान हमें देखने को मिलते हैं।

प्रदूषण मावसबसे मुख्य एवं भयंकर प्रकार है वायु प्रदूषण जो कि इंसानों के लिए घातक साबित होता है वायु प्रदूषण से मनुष्य के फेफड़ों तथा अन्य भागों मे सीधा प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण के अलावा जब उद्योगों कारखानों से निकला रासायनिक पदार्थ किसी पेयजल जैसे नदियों, तालाबों में जाकर गिरता है तो यह रासायनिक पदार्थ उस जल को प्रदूषित करते हैं जिससे जल प्रदूषण होता है।

जल प्रदूषण भी मनुष्य तथा जलीय प्राणियों के लिए खतरनाक है, जब वन्य, जलीय जीव इस जल को ग्रहण करते हैं। तो हर साल जल प्रदूषण की वजह से वे अपने प्राण त्याग देते हैं। और चूंकि मानव जीवन के लिए जल मूलभूत आवश्यकता है, अतः जब यदि मनुष्य किसी प्रदूषित जल जिसमें कीटाणु बैक्टीरिया वायरस शामिल होते हैं उसको ग्रहण करता है तो मनुष्य के शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती हैं।

समय के साथ जल प्रदूषण आज सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है क्योंकि धीरे-धीरे पेयजल में कमी आ रही है और नदी तालाबों के प्रदूषित होने की वजह से जल समस्या का भयंकर संकट विश्व के समक्ष आ चुका है।

इसके साथ ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए परिवहन हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन वाहनों की अधिक संख्या बढ़ने से आज एक नए प्रदूषण का जन्म हुआ है जिसे ध्वनि प्रदूषण कहा जाता है! वाहनों से निकलता हुआ यह शोर पर्यावरण तथा मनुष्य दोनों के लिए नुकसानदायक है।

इससे वातावरण में शांति भंग होती है साथ ही ध्वनि स्तर अधिक होने की वजह से यह शोर मनुष्य के सुनने की प्राकृतिक क्षमता में कमी लाता है। साथ ही बच्चों में बहरापन जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।

इसके अलावा बात करें भूमि प्रदूषण की तो इस प्रदूषण से भी पर्यावरण अछूता नहीं रहा है। भूमि मनुष्य के जीवन जीने का आधार है इस पर मनुष्य अपना जीवन व्यतीत करता है! लेकिन चूंकि जनसंख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है और लोगों के लिए आवास की कमी की वजह से घर बनाने के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हो रही है।

जिससे पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में कमी हो रही है जिसका सीधा संबंध ऑक्सीजन से है जिसके स्तर में भी गिरावट आई है। भूमि प्रदूषण होने से न सिर्फ मनुष्य बल्कि प्रथ्वी पर निवास करने वाले जीव जंतुओं के पर्यावरणीय असंतुलन पर भी खतरा उत्पन्न हुए है। जैसा कि हम जानते हैं पेड़ हमारे पर्यावरण में भूमि की ऊपरी परत को पानी में बहने एवं हवा में उड़ने से बचाते हैं साथ ही इससे भूमि की उर्वरक क्षमता भी बढ़ती है।

पेड़ों की कटाई होने से आज प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा है, भूमि की उपजाऊ शक्ति में कमी आई है, किसानों को अच्छी फसल के लिए रासायनिक खाद का उपयोग करना पड़ता साथ ही इससे भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं का भी मनुष्य को सामना करना पड़ रहा है।

अतः इस प्रकार देखा जाए तो हम अपने पर्यावरण में प्रदूषण की मार से गिरे हुए हैं प्रदूषण के यह सभी प्रकार आज हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं जिन पर नियंत्रण पाना अत्यंत जरूरी है।

पर्यावरण में फैले इस प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए अनेक उपयोगी कदम उठाए जा सकते हैं जिसमें से कुछ मुख्य हैं।

  • जनसंख्या वृद्धि पर कमी लाना
  • रासायनिक उर्वरकों एवं खाद के स्थान पर जैविक खाद का उपयोग में लाना
  • कूड़े कचरे को Recycle (पुनः उपयोग) करना
  • फैक्ट्रियों कारखानों में से निकलने वाले विषैले जल को नदियों में बहने से रोकना।
  • वायु प्रदूषण के लिए यातायात के साधनों का जागरूकता से उपयोग करना

जैसे अनेक कार्य प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए किए जा सकते हैं! और इसमें सबसे विशेष है की सबसे पहले हम स्वयं प्रदूषण को कम करने के लिए कार्य करना शुरू करें। और समाज में भी लोगों को बढ़ते प्रदूषण से होने वाले नुकसान के बारे में अवगत करायें।

यह काम किसी एक व्यक्ति के बस का नहीं यह कार्य प्रदूषण को कम करने का सभी पृथ्वी वासियों का है! इसके लिए न सिर्फ सरकारें कदम उठा सकती हैं बल्कि एक नागरिक के तौर पर हमें प्रदूषण कैसे कम करना होगा यह सोचना होगा और उस पर अमल करना होगा

तभी हम अपने देश में अपने राज्य में प्रदूषण के स्तर पर कमी लाकर पर्यावरण को हरा-भरा बना पाएंगे और विकास की आंधी में पर्यावरण को हो रहे नुकसान से उसे बचा पाएंगे। क्योंकि पर्यावरण स्वास्थ्य होगा तो हम स्वस्थ रहेंगे क्योंकि एक पर्यावरण में हम सभी प्राणी निवास करते हैं.

धन्यवाद!

भाषण 2 (Medium Speech On Pollution In Hindi)

आदरणीय प्रधानाचार्य जी, अध्यापक एवं अध्यापिकाओं, एवं प्रिय साथियों को सुप्रभात। मेरा नाम… है और मैं… कक्षा में पढ़ता हूं! आज मैं यहां इस मौके पर पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण के स्तर पर अपने विचारों को व्यक्त करना चाहता हूं!

साथियों प्रदूषण एक ऐसा शब्द है जिससे हम सभी परिचित हैं परंतु हमारे समाज के लिए यह कितना हानिकारक हो सकता है इसकी कल्पना शायद कम लोगों ने ही की होगी! प्रदूषण हमारे पर्यावरण के लिए एक ऐसे बुरे दीमक की तरह है जो धीरे धीरे पूरी पर्यावरण को खोखला कर देता है। इसे रोकना इतना आसान तो नहीं परंतु हां हम जरूर मिलकर इसे पर्यावरण को नष्ट करके हमें मिटाने से खुद को बचा सकते हैं।

प्रदूषण के पर्यावरण में फैलने के कई कारण हो सकते हैं! जिनमें से एक प्रमुख कारण रासायनिक उद्योगों से निकलने वाला धुंआ है, जो वायु को विषैला बना देता है इसके अलावा जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण वायु प्रदूषण भी प्रदूषण के ही घटक है। यदि पिछले सालों से वर्तमान की तुलना करें तो आज प्रदूषण के स्तर काफी बढ़ चुका है अब इसके बढ़ने का एक मुख्य कारण है मनुष्य द्वारा प्रकृति संसाधनों का दोहन करना।

मनुष्य विकास की आंधी में इतना अंधा हो चुका है कि वह भगवान द्वारा दिए गए हमें प्राकृतिक उपहारों को भी भुला दे रहा है। प्राकृतिक संसाधन जैसे जल, वायु, भूमि इन सभी का दोहन पर्यावरण में देखा जा सकता है।

और प्राकृतिक संसाधनों को हुए इस नुकसान का सीधा असर  जीव-जंतु मनुष्यों एवं अन्य प्राणियों को हो रहा है। आए दिन नई नई रासायनिक फैक्ट्रियों कारखाना का निर्माण होना और इसके लिए बड़ी मात्रा में पेड़ों की कटाई इस बात की गवाही देती है कि मनुष्य अपने विकास अपने निजी स्वार्थों के लिए अंधा हो सकता है।

हां विकास की राह पर चलना गलत नहीं है! परंतु हमें विकास कि इस प्रक्रिया में ध्यान देना होगा कि इससे पर्यावरण का नुकसान ना हो सके! विश्व के अनेक विकसित देश पर्यावरण की समस्या झेल रहे हैं वहां प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है! उन देशों से भारत को यह सीखना चाहिए कि चाहे हम कितनी ही तरक्की क्यों ना कर ले हम प्रकृति के खिलाफ नहीं जा सकते! और यदि हम उसके विपरीत कार्य करते हैं तो उसका भयंकर परिणाम हमें देखने को मिलेगा।

इसका प्रमाण आए दिन भूस्खलन, भूकंप, मृदा अपरदन, तथा दिन प्रतिदिन बढ़ते वायु प्रदूषण का स्तर है! जिससे  आज आज वह गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो रही है जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.

अतः अपने भाषण के अंतिम शब्दों में कहना चाहूंगा कि प्रदूषण को कम करने के लिए हमें आज से और अभी से इसके लिए कार्य करने होंगे। और मिलकर हमें समाज को उसके प्रति जागरूक कर अपने देश में प्रदूषण कम कर पर्यावरण के प्रदूषण को नियंत्रित कर इसका भला करना होगा।

धन्यवाद!

भाषण 3 (Short Speech On Pollution In Hindi)

आज प्रदूषण का कहर हमारे पर्यावरण में साफ-साफ देखा जा सकता है! विशेषकर शहरों- महानगरों में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है। जिससे वहां रहने वाले लोगों के लिए एक भयंकर समस्या उत्पन्न हो चुकी है! उदाहरण के तौर पर दिल्ली भारत की राजधानी है यह शहर विश्व के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में से एक गिना जाता है!  तो प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए इसके रोकथाम के उपायों पर विचार करना जरूरी हो जाता है।

अन्यथा प्रदूषण नामक एक गंभीर बीमारी हमारे पर्यावरण के लिए विनाशकारी साबित होगी जिससे मनुष्य एवं प्राणी जगत के अन्य जीवों का विनाश होना निश्चित हो जाएगा! क्योंकि जीवन जीने हेतु वायु- जल आवश्यक है अगर यही वायु एवं जल दूषित हो जाए तो बीमारियों का शरीर में प्रवेश करना तय है! इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डॉक्टर्स का भी यह मानना है पिछले कुछ दशकों में पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण से मनुष्य के शरीर में रोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।

आज हमें ऐसी नई नई बीमारियां देखने सुनने को मिलती हैं जिनका पहले कोई अस्तित्व ही नहीं था। आज से 100 वर्ष पूर्व जहां हमारा पर्यावरण स्वच्छता, हरियाली से परी पूर्ण था! आज वही विकास की आड़ में रोजाना नए नए कारखाना एवं टेक्नोलॉजी विकसित की जा रही है जिससे प्रदूषण स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

मनुष्य अपने निजी हित के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने से पूर्व एक बार भी नहीं सोच रहा! इसलिए प्रदूषण के प्रकार जैसे जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण आज हमारे वातावरण में तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकार द्वारा प्रदूषण की रोकथाम के निर्णय के साथ ही एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमें खुद को भी प्रदूषण कम करने के विषय पर विचार करना चाहिए।

हमारे दैनिक जीवन में प्रदूषण कम से कम हो सके! इसके लिए कुछ कार्य जैसे कि आसपास अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। जिससे पर्यावरण में अधिक से अधिक हरियाली हो! और जो प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है उसमें कमी लाई जा सके। इसके अलावा प्रदूषण रोकने के लिए प्लास्टिक से बने थैलों का उपयोग करने की बजाय कपड़े से निर्मित थैलों का उपयोग करना चाहिए।


हम इन छोटे-छोटे कार्यो को करते हुए दैनिक रूप से अपने मस्तिष्क में प्रदूषण को स्वयं कम करने का जिम्मा उठा लें! तो हम सब मिलकर भी प्रदूषण की मात्रा को खत्म तो नहीं परंतु नियंत्रित जरूर कर सकते हैं। जिससे हम अपने आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण देकर बेहतर जीवन का तोहफा दे सकते हैं।

धन्यवाद!

तो दोस्तों आज इस पोस्ट में हमने आपको प्रदूषण पर भाषण (Pollution Speech In Hindi) 2 minute short and long speech on air & water in hindi के बारे में बताया है, और आपके साथ प्रदूषण पर तीन speech share किए है, आपको जो भी अच्छा लगे आप उसको इस्तेमाल कर सकते हो।

उम्मीद है की आपको प्रदूषण पर भाषण (Pollution Speech In Hindi) का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।


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