26 जनवरी पर भाषण – Republic Day Speech In Hindi

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26 जनवरी पर भाषण – Republic Day Speech In Hindi! दोस्तों अगर आप अपने स्कूल या कॉलेज में 26 जनवरी पर भाषण देना चाहते हो तो आँजके इस पोस्ट में हम आपके साथ 26 January par nibandh, short and long Republic Day Speech, Republic Day Speech for teachers and students in hindi share करिंगे।

भारत के इतिहास में जितना महत्व 15 अगस्त की तारीख का है, उसी प्रकार हम भारतीयों के लिए Republic Day अर्थात गणतंत्र दिवस का है।

देश की संविधान स्थापना के अवसर पर भारत के सभी स्कूलों में गणतंत्र दिवस का आयोजन किया जाता है। इस दिन देश को ब्रिटिश शासन से मिली मुक्ति के पश्चात भारत में भारतीय शासन की स्थापना की गयी, इसलिए प्रत्येक नागरिक इस दिवस को राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मनाते हैं.


आजादी से पूर्व अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर अपने नियम कानून थोप कर भारतीयों का खूब शोषण किया गया। गुलामी की जंजीरों से जकड़े भारत को खुद की असल पहचान भारतीय संविधान की स्थापना से मिली। इस रिपब्लिक डे के अवसर पर यदि आपको भी इस शुभ अवसर पर बोलने का मौका दिया है तो Republic Day के विषय पर अच्छी स्पीच तैयार करने हेतु यह आर्टिकल तैयार किया गया है।

सबसे पहले आप मंच पर जाकर सभी शिक्षक गण, प्रिंसिपल तथा माननीय मुख्य अतिथि का अभिवादन करें! इसके साथ ही आप अपना थोड़ा परिचय दें अपना नाम और आप कौन सी कक्षा में पढ़ते हैं यह बताएं।

इसके अलावा यदि स्कूल के अलावा किसी दूसरे मंच पर आपको बोलने का मौका दिया गया तो उस मंच से आप किस स्कूल में पढ़ते हैं वह भी जरूर बताएं?  तथा सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयां देने के उपरांत अपनी class के टीचर प्रिंसिपल एवं सहपाठियों का धन्यवाद करें! की उन्होंने इस अवसर पर आपको अपने देश के संविधान पर विचार व्यक्त करने का मौका दिया!

उसके बाद आप अपनी स्पीच बोलना शुरू कर सकते हैं आप कुछ इस तरह रिपब्लिक डे के विषय पर सुनियोजित स्पीच मंच से सुना सकते हैं!

26 जनवरी पर भाषण – Republic Day Speech In Hindi

भाषण 1 (Long Speech On Republic Day In Hindi)

मुझे आज यह कहते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि आज हम अपना 70 वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं! इस खास मौके पर आज मैं अपने विचार गणतंत्र दिवस पर रखना चाहूँगा!

अंग्रेजो से देश को आजादी दिलाने के लिए कड़ा संघर्ष करते हुए देश के अनेक वीर सेनानीयों ने अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए! तत्पश्चात 200 वर्षों से भी अधिक सालों के बाद हमें अंग्रेजी शासन से मुक्ति मिल गई! लेकिन मुक्ति के पश्चात देश के राजनीतिक एवं प्रशासनिक कार्यों को सुव्यवस्थित ढंग से चलाना तथा जहा देश के सभी नागरिकों को समान रूप से जहाँ बिना रंग, भेद, जाती इत्यादि के आधार पर भेदभाव को रोकना आसान कार्य नहीं था

अतः देश की शासन व्यवस्था की बागडोर की जिम्मेदारी सही हाथों में दी जा सके! इसलिए देश में खुद का एक संविधान बनाया गया इस संविधान में वे सभी तौर तरीके नियम बनाए गए हैं जिससे देश के सभी नागरिकों एवं राष्ट्र का हित शामिल हो।

देश की आजादी के उपरांत देश के लिए संविधानो की रूपरेखा से लेकर अंतिम पड़ाव तक इसमें कुल 2 साल 11 माह 18 दिन का समय लगा! और तब जाकर 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू किया गया। और भारत देश को पूर्ण प्रभुता संपन्न गणतंत्र घोषित किया गया

और तब से लेकर अब तक प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में हम मनाते आ रहे हैं। देश की आजादी में हुए शहीदों की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जा सकती थी और भारत को फिर से किसी देश का गुलाम ना बनना पड़े और सभी नागरिकों में भाईचारा कायम रह सके इसके लिए संविधान बनाया गया।

संविधान के निर्माता के रूप में बाबा भीमराव अंबेडकर को जाना जाता है। संविधान बनाने हेतु एक सभा बनाई गई थी और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर उस प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे! आजादी के उपरांत भी बाबा साहब ने देश को आजादी दिलाने की लिए काफी संघर्ष किया देश में फैली रंगभेद, जातिवाद की कुरीति को खत्म करने के लिए नागरिकों के लिए संविधान में ऐसे नियम कानून बनाए ताकि सभी को समान महत्व मिल सके चाहे फिर वह छोटा हो या बड़ा!

गणतंत्र दिवस के इस राष्ट्रीय पर्व में वैसे तो हर जगह इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है परंतु देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर विशेष आयोजन किया जाता है! गणतंत्र दिवस के के दिन भारतीय सेना द्वारा शहीदों की याद में भव्य परेड निकाल कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है, इस परेड एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों को न सिर्फ पूरा भारतवर्ष में बल्कि पूरी दुनिया देखने के लिए उत्साहित रहती है।

इस मौके पर हर साल विभिन्न देशों के मुख्य अतिथियों को आमंत्रित किया जाता है। गणतंत्र दिवस की इस राष्ट्रीय पर्व के मौके पर युवा  से लेकर बुजुर्ग तक परेड को देखने के लिए सुबह 4:00 बजे से ही इंडिया गेट में दर्शकों की बड़ी भीड़ मौजूद हो जाती है।

वाकई गणतंत्र दिवस का यह राष्ट्रीय पर्व सभी भारतीयों के लिए एक विशेष दिन होता है ! जो देश की एकता अखंडता एवं एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की महानता को दर्शाता है।  क्योंकि रिपब्लिक का हिंदी अर्थ गणतंत्र होता है जिसका अर्थ है जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा अर्थात ऐसा शासन जहाँ जनता सर्वोपरि होती है। देश में 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति सभी को मताधिकार प्राप्त है जिसके जरिए वे मनचाहे राजनेता को शासन पर बिठा सकते हैं।

भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान भी कहा जाता है यह संविधान देश के नागरिकों को उनके सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकारों से अवगत कराता है। और इसमें उल्लेखित कई अहम अधिकारों में से प्रमुख अधिकार यह है कि हम अपनी बात को निष्पक्ष रुप से रख सकते हैं। देश का कोई भी नागरिक सरकार के किसी अनचाहे फैसले के विरुद्ध शांति पूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा सकता है।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के अनुसार हमने एक ही संविधान के अंतर्गत हमारी पूर्ण महान एवं विशाल देश के अधिकारों को पाया है, जो देश में रह रहे सभी पुरुषों एवं महिलाओं के कल्याण की जिम्मेदारी का वहन करता है। अतः एक छात्र एवं जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारा भी फर्ज बनता है कि हम देश के संविधान का सम्मान करें उसमें दिए गए अधिकारों का पालन करें और किसी के अधिकारों का उल्लंघन कर उन्हें एवं उनकी भावनाओं को ठेस ना पहुंचाएं।

और इन्हीं अंतिम शब्दों के साथ मैं गणतंत्र दिवस के इस भाषण को विराम देना चाहूँगा!

भाषण 2 (Medium Speech On Republic Day In Hindi)

माननीय मुख्य अतिथि एवं यहां उपस्थित सभी अध्यापक गणों को मेरी तरफ से सुप्रभात!! आज हम यहां देश के राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस को मनाने जा रहे हैं। मैं आभारी हूं उन शिक्षक गणों का जिन्होंने मुझे आज इस मौके पर अपने विचार रखने का मौका दिया।

रिपब्लिक डे अर्थात “गणतंत्र दिवस” एक पावन पर्व है। क्योंकि बिना रंग- जाती, लिंग के आधार पर भेदभाव के बगैर सभी भारतवासी पूर्ण सौहार्द के साथ गणतंत्र दिवस मना कर देश के लिए शहीद हुए उन क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हैं जिन्होंने देश को अंग्रेजी शासन से मुक्ति दिला कर हमें स्वतंत्र जीवन दिया। हमारे देश में कुछ दिवस जैसे स्वतंत्रा दिवस, गांधी जयंती, गणतंत्र दिवस ऐसे मौके हैं जिन्हें कोई भी भारतवासी नहीं भुला सकता। क्योंकि इन राष्ट्रीय पर्वों में वह शक्ति होती है जो जनसाधारण को एकता एवं अखंडता के सूत्र में पिरोये रखते है।

आज का ही दिन था जिस दिन हमारा देश एक पूर्ण गणतंत्र बना था। गणतंत्र का शाब्दिक अर्थ है जनता के लिए, जनता द्वारा शासन। 26 जनवरी वर्ष 1950 कादिन भारतीय जनता के लिए एक विशेष दिन था। क्योंकि देश को आजादी 3 वर्ष पूर्व मिल गई थी लेकिन असल मायनों में लोगों के अधिकार एवं हक उन्हें इसी तिथि के बाद से मिले।

संविधान द्वारा देश के नागरिकों को समान रूप से अधिकार प्रदान किए हैं! यह अधिकार राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक स्तर पर सभी के लिए समान हैं। कोई भी इन अधिकारों का प्रयोग अपने हित के लिए कर सकता है और यदि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति या समूह के अधिकारों का अपमान कर उन्हें कष्ट पहुंचाता है तो उसके लिए भी विशेष सजा का प्रावधान संविधान में है।

असल में अंग्रेजों के नियम कायदों को हटाकर इस दिन भारतीय नागरिकों के हित के अनुकूल अधिकार भारतीय संविधान में जोड़े गए हैं। इस संविधान को बनाने का कार्य हालांकि आसान बिल्कुल भी नहीं था कई बैठकों में संशोधन एवं विचार विमर्श के बाद हमारे देश का एक संविधान पूर्ण रूप से तैयार किया गया। जिसमें कुल 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा!

संविधान को बनाने एवं इसे लागू करने में सबसे बड़ा योगदान बाबा भीमराव अंबेडकर को माना जाता है! जिन्होंने अपना जीवन सर्वस्व असमानता के खिलाफ लड़ाई लड़कर दूसरों को सम्मान का जीवन देने में न्योछावर कर दिया। गणतंत्र दिवस हम सभी भारतीयों के अंदर एक नए हर्ष उल्लास और चेतना का संचार करने का कार्य करता है। स्कूल हो या ऑफिस या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर गणतंत्र दिवस के दिन झंडारोहण किया जाता है एवं सभी लोग एक साथ इस मौके पर उपस्थित होकर राष्ट्रगान गाते हैं,जिससे पूरे विश्व को भारत के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने एवं विविधता में एकता का संदेश जाता है।


साथ ही प्रत्येक वर्ष जब हम अपना गणतंत्र दिवस मनाते हैं  तो यह दिवस छात्रों युवाओं एवं देश के प्रत्येक नागरिक के कर्तव्य एवं अधिकारों की याद दिलाता है की शहीद क्रांतिकारियों सेनानियों ने इस देश को आजादी दिलाने में अपनी जान की कीमत लगाई है। और हमें उसे व्यर्थ कदापि नहीं गंवाना चाहिए। और राष्ट्र हित में सदैव कार्य करना चाहिए।


भाषण 3 (Short Speech On Republic Day In Hindi)

आदरणीय मुख्य अतिथि यहां उपस्थित सभी अध्यापक गणों और सभी छात्रों को मेरा नमस्कार! आज हम हर साल की तरह ही देश का गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं! देश के गणतंत्र दिवस मनाने का कारण संविधान का देश में लागू होना है इस दिन को “अधिकारों का स्थापना दिवस” भी कहा जाता है।

जिस तरह आज हम हर्षोल्लास के साथ इस गणतंत्र दिवस को मना रहे हैं! इसी प्रकार 26 जनवरी 1950 को जिस दिन संविधान लागू किया गया था तो देश के नागरिकों के लिए यह विशेष दिन था यह दिन उनके अधिकारों को पाने अवम अपने राष्ट्र में सम्मानीय जीवन जीने की शुरुवात का था।

जिस राष्ट्र में हम रहते हैं वहां के लोगों को कौन कौन से अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त किए जा रहे हैं? यह बेहद मायने रखता है हमारे देश का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान कहा जाता है! इस संविधान में देश के नागरिकों को मूल अधिकार में शामिल सभी मौलिक अधिकारों के अलावा राजनीतिक अधिकार दिए गए हैं जिससे हम स्वेच्छा पूर्वक किसी भी राजनेता को अपना वोट देकर उसे शासन की बागडोर की जिम्मेदारी दे सकते हैं।

साथ ही संविधान द्वारा दिए गए हमें अधिकारों का कोई उल्लंघन ना कर सके उसके लिए भी विशेष नियम कानून बनाए गए हैं! जिसके अंतर्गत दोषी को कानूनी कार्रवाई के तहत उचित सजा दी जाती है। लेकिन यदि हम भारतीय देश के संविधान की तुलना आज भी अन्य देशों से करें तो कई देशों में तो अभी भी संविधान है ही नहीं! अर्थात उन देशों के नागरिक आज भी अपने मूलभूत अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और कुछ देश ऐसे हैं जहां पर संविधान भी हैं और अधिकार भी दिए गए हैं परंतु वह काफी सीमित हैं और आप कह सकते हैं कि उन देशों में नाममात्र का ही संविधान लागू किया गया है।

अतः हमें इस बात का गर्व होना चाहिए कि हम एक लोकतांत्रिक राज्य में रहते हैं जहां पर हमारे द्वारा चुनी गई सरकार द्वारा हमारी हित के लिए फैसले लिए जाते हैं और हां यदि सरकार द्वारा कोई ऐसा फैसला लिया गया जो नागरिकों के हित में नहीं है तो कानूनों के दायरे में रहकर जनता उस सरकार को गिरा सकती है।

दोस्तों संविधान में दिए गए अधिकारों की एक लंबी सूची नागरिकों के लिए है! लेकिन नागरिकों के हित में शामिल किये गए इन अधिकारों को बनाना कोई आसान काम नहीं था। कई ऐसे स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी थे जिन्होंने देश को आजादी से पूर्व ही एक लोकतांत्रिक देश बनाने के लिए सपना देख चुके थे!

पहली बार वर्ष 1924 में स्वर्गीय पंडित मोतीलाल नेहरू ने संविधान सभा के गठन को लेकर अंग्रेजों से मांग की! परंतु उन्होंने इस मांग को  ठुकरा दिया लेकिन वह यहीं रुके नहीं उसके बाद से लगातार संविधान सभा के गठन की मांग उठती रही और वर्ष 1939 में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसके अनुसार यदि देश में संविधान के निर्माण करना है तो संविधान सभा आवश्यक है!

और यही सही संविधान को निर्मित करने के लिए एक संविधान सभा बनाई गई और विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श करते हुए काफी सोच समझकर देश के लिए एक संविधान तैयार किया गया, एक ऐसा दस्तावेज तैयार किया गया जिसमें सिर्फ और सिर्फ नागरिकों का हित छुपा हो

इतने कठोर संघर्ष के बाद, स्वतंत्रता सेनानियों के शहीद होने के बाद बनाये गये इस संविधान का हम सभी पालन करें हमारा यह फर्ज बनता है। धन्यवाद!

तो दोस्तों उम्मीद है की अब आपको 26 जनवरी पर भाषण (Republic Day Speech In Hindi) से जुड़ी पूरी जानकारी मिल चुकी होगी, और आप 26 January par nibandh, short and long Republic Day Speech, Republic Day Speech for teachers and students in hindi के बारे में काफ़ी कुछ जान गये होंगे।


उम्मीद है की आपको 26 जनवरी पर भाषण – Republic Day Speech In Hindi का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।

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