जल बचाओ पर भाषण – Save Water Speech In Hindi


दोस्तों अगर आप जल बचाओ अभियान पर भाषण या फिर जल बचाओ भाषण धूँड रहे हो तो आप बिलकुल सही जगह आए हो क्यूकी आज इस पोस्ट में हम जल बचाओ पर भाषण (Save Water Speech In Hindi) के बारे में जानिंगे।

बचपन से ही विभिन्न सामाजिक मुद्दों एवं किसी आयोजन के मौके पर जल है तो कल है? पानी बचाएं। को लेकर हम सुविचार, पोस्टर्स एवम भाषण सुनते आए हैं ताकि जल की महत्वता इसके संरक्षण की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके।

क्योंकि जल के बिना मनुष्य का जीवन संभव नहीं जल मनुष्य के शरीर में पहुंचकर जहां उसमें प्राण भरता है। साथ ही दैनिक जीवन में विभिन्न कार्यों के लिए इसका प्रयोग होता है, जल हमारी एक मूलभूत आवश्यकता है परंतु दुर्भाग्यपूर्ण यह है जल की बड़ी मात्रा में बर्बादी होती है।


यदि आप एक स्कूली या कॉलेज के छात्र है और आपको जल बचाने के विषय पर एक भाषण के माध्यम से अपने विचारों को रखने के लिए अपनी कक्षा या स्टेज पर आमंत्रित किया गया है। तो इस आर्टिकल में हम जल बचाओ भाषण (Save Water speech in Hindi) स्पीच लेकर आए हैं, जिन्हें आप किसी आयोजन पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह स्पीच आपकी परीक्षा के दौरान काम आ सकती है।

जल बचाओ पर भाषण – Save Water Speech In Hindi


भाषण 1 (Long Speech On Save Water In Hindi)

माननीय अतिथिगण, प्रधानाचार्य जी एवं यहां पर उपस्थित सभी शिक्षकों को सुप्रभात। मेरा नाम….है  मैं कक्षा… पढ़ता हूं। आज मैं यहां इस मौके पर जीवन के एक गंभीर मुद्दे जल बचाओ के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करने जा रहा हूं।

हम सभी जानते हैं जल मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकता है इस पृथ्वी पर मनुष्य जीव- जंतु एवं वन्य प्राणियों के जीवन जीने हेतु जल का होना परम आवश्यक है।

परंतु जैसा कि हमें ज्ञात है पृथ्वी पर जल एक तिहाई है। इस जल का कुछ भाग हिमालय में बर्फ के रूप में तथा कुछ नदी जलाशयों के रूप में मौजूद है। वही पेयजल अर्थात स्वच्छ जल कुल जल का काफी कम मात्र 0.98% है। और इस जल का भी मनुष्य द्वारा सही उपयोग नहीं किया जा रहा है।

एक तरफ जनसंख्या पूरे विश्व में तेजी से बढ़ रही है वहीं दूसरी तरफ जल की बर्बादी से मनुष्य के लिए जल संकट बढ़ता जा रहा है। मानव अपनी गतिविधियों अपने निजी स्वार्थ के लिए साफ एवं स्वच्छ जल को दूषित & बर्बाद  करता जा रहा है। परिणाम स्वरुप पानी के स्तर में लगातार कमी आ रही है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए की मनुष्य के लिए ही नहीं अपितु पूरे पर्यावरण के लिए जल होना अत्यंत आवश्यक है.

क्योंकि मनुष्य की तरह ही पेड़-पौधे, वनस्पति, बवन्यजीव जल पर आश्रित हैं।

आंकड़ों के मुताबिक वैश्विक भूजल की कमी वर्ष 2000 से 2010 के बीच बढ़कर 22% तक हो चुकी है। रिपोर्ट्स की माने तो भारत विश्व के कुल जल का 24% हिस्सेदार है, लेकिन भारत में भूजल की कमी तेजी से हो रही है। इसका विशेष कारण बढ़ती जनसंख्या एवं लोगों द्वारा जल की महत्वता पर ध्यान न देना है।

हम अभी भी पानी के संरक्षण का विशेष महत्व नहीं दे रहे हैं, लोग अपनी दैनिक जिंदगी में पानी की बर्बादी मानो ऐसे कर रहे हैं जैसे जल असीमित मात्रा में हमारे लिए उपलब्ध हो। अगर ऐसा ही हाल रहा तो स्वच्छ पेयजल कम होने की वजह से वह दिन दूर नहीं जब पूरा विश्व पानी के संकट से विनाश की कगार पर होगा।

जब मनुष्य एक एक बूंद पानी के लिए तरसेगा, पृथ्वी बंजर हो जाएगी। जीव जंतु भी जल के लिए दम तोड़ देंगे। एवम पूरा पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा अतः ऐसी स्थिति आने से पूर्व संभलना जरूरी है और जल का बचाव करना बेहद जरूरी हो जाता है।

हमें यह समझना होगा कि जल ईश्वर द्वारा मनुष्य को दिया गया एक अनमोल उपहार है। जिसकी कीमत को समझना अत्यंत जरूरी है। हमें इसके अभाव को देखते हुए जल के बचाव के लिए इस वैश्विक मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और जल को बचाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

जल बचाने का काम सरकार का नहीं है अपितु जल का संरक्षण देश के प्रत्येक नागरिक द्वारा अपने कर्तव्य का पालन कर किया जा सकता है। हम दैनिक रूप से कुछ छोटे-छोटे कार्य यदि करें तो हम जल की बर्बादी होने से बचा सकते हैं।

  • जैसे अनावश्यक रूप से नल को खुला न छोड़कर पानी के बहाव को रोकें।
  • नहाने कपड़े धोने साफ-सफाई जैसे दैनिक कार्यों में कैसे कम से कम पानी की बर्बादी हो इसकी और ध्यान देना चाहिए।
  • बिजली बचाकर भी जल के बचाव में योगदान दिया जा सकता है क्योंकि जल से ही बिजली तैयार होती है।
  • वर्षा ऋतु में जल संचयन की प्रक्रिया का पालन कर जल संरक्षण करना चाहिए।

यह छोटे-छोटे मगर दैनिक रूप से इन कार्यों को किया जाएं तो जरूर जल संरक्षण किया जा सकता है। जी न सिर्फ हमारे आज को बेहतर बनाएंगे बल्कि आने वाली पीढ़ी भी इसके लिए हमें धन्यवाद करेगी।

इसके अलावा यदि जल दूषित होता है तो वह भी जल की एक बर्बादी कहीं जाएगी। अतः जल का प्रदूषण ना हो इसके लिए सरकार द्वारा ठोस नीतियां बनानी जानी चाहिए। ऐसे फैक्ट्री, उद्योग जिनके रासायनिक पदार्थ जल में मिलकर उसे दूषित बनाते हैं उनको इसके खिलाफ उचित नोटिस दिया जाना चाहिए।

बल्कि रासायनिक फैक्ट्रियों को ऐसे स्थान पर स्थापित किया जाना चाहिए जो नदी- तालाबों से दूर हो ताकि उनकी वजह से नदी का जल दूषित ना हो सके। दुर्भाग्य से सैकड़ों निर्दोष जलीय जीव की प्रजातियां जल के प्रदूषण की वजह से अपना दम तोड़ देती हैं, साथ ही मनुष्य में आए दिन नई नई गंभीर बीमारियां देखने को मिलते हैं। जिसके पीछे जल प्रदूषण अहम भूमिका निभाता है।

जल प्रदूषण न सिर्फ भारत बल्कि विश्व के विकसित देशों के लिए भी खतरा बन चुका है। पिछले कई दशकों में विकास के नाम पर प्रदूषण का जो कहर वातावरण में फैला है। उसको कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज भारत ने गंगा, यमुना, जैसी नदियां जल प्रदूषण की मार को झेल रही है।

जो वाकई हमारे लिए एक चिंतनीय मुद्दा है, और इस जल की हो रही बर्बादी को रोकने के लिए उचित कदम उठाने बेहद आवश्यक है।

पूरे विश्व में 22 मार्च को जल संकट की समस्या के लिए लोगों को जागरूक करने एवं जल के संरक्षण हेतु जल दिवस मनाया जाता है। विश्व में जल की भूमिका एवं इसकी महत्वता से अवगत कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 1992 में में पहली बार जल दिवस मनाने की शुरुआत की।

विश्व आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है लेकिन इसी बीच जल के मायने और बढ़ते जा रहे हैं। क्योंकि हम तरक्की चाहे कितने ही कर ले बिना जल के हम जीवन नहीं जी सकते। और बिना जीवन के मनुष्य के द्वारा कि गई प्रगति कोई काम नहीं आएगी। इसीलिए विश्व के बड़े-बड़े विकसित देश संयुक्त राष्ट्र संघ निरंतर रूप से वैश्विक स्तर पर जल के बचाव को लेकर सभी सदस्य देशों को जागरूक करता रहता है।

पहले जहां व्यापार, भूमि तथा अन्य क्षेत्रों के लिए एक देश दूसरे देश से लड़ाई करता था। परंतु आज जल की विकराल समस्या की वजह से कई देशों के एक दूसरे से विवाद चल रहे हैं। इसलिए जल की यह कमी दर्शाती है। और ऐसा कई बार माना भी गया है कि तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिए हो सकता है। अतः पानी की लड़ाई में किसी का नुकसान ना हो उसके लिए जरूरी है आज ही विश्व जल के संरक्षण को लेकर कदम उठाएं।

मुझे आशा है एक शिक्षित जागरूक नागरिक होने के नाते हम सभी जल की महत्वता को समझते हुए इसके बचाव के लिए मिलकर सहयोग करेंगे। और एक निवेदन के रूप में जल को बचाने की जिम्मेदारी कंधों में लेकर इस राष्ट्र के बेहतर भविष्य कि हम जिम्मेदारी लेंगे।

धन्यवाद!

भाषण 2 (Medium Speech On Save Water In Hindi)

माननीय प्रधानाचार्य, समस्त शिक्षक मगण और यहां उपस्थित प्रिय सहपाठियों को मेरा नमस्कार।। आज मैं यहां जल बचाओ के इस गंभीर विषय पर आपके समक्ष एक छोटा सा भाषण सुनाने जा रहा हूं।

जल ईश्वर द्वारा इस प्राणी जगत को दिया गया एक अनमोल उपहार है जिसका उपयोग हर कोई कर सकता है। लेकिन कुछ वर्ष पहले जहां जल तक प्रत्येक प्राणी की पहुंच आसान थी। वहीं अब जल दुर्लभ होते जा रहा है परिणाम स्वरूप आज जल मूल्यवान हो चुका है।

आज शहरों – नगरों में अपनी प्यास बुझाने के लिए व्यक्ति को पैसे खर्च कर जल को खरीदना पड़ता है और आने वाले समय में मुफ्त में मिलने वाला जल लोगों के लिए महंगा हो जाएगा। स्वच्छ जल मनुष्य जीवन की पहली प्राथमिकता है जीवन के अनेक दैनिक कार्यों को पूर्ण करने के लिए जल का होना अति आवश्यक है।

लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण मनुष्य द्वारा अपने निजी हित के लिए की जाने वाली जल की बर्बादी आज उसके ही लिए एक गंभीर चुनौती बन रही है। स्वच्छ पेयजल के स्तर में कमी आने की वजह से मनुष्य के समक्ष गंभीर जल संकट खड़ा हो रहा है। नदियों का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है बर्फ पिघल रही है और हर व्यक्ति तक पानी की पहुंच धीरे-धीरे कठिन होती जा रही है।

विश्व में जैसे-जैसे जनसंख्या संकट बढ़ता ही जा रहा है, परिणाम स्वरूप आज जल बचाना मनुष्य की जरूरत बन चुका है।

यदि हम अभी नहीं संभले तो जल संकट से न सिर्फ वातावरण में रहने वाले पेड़-पौधे, जीव जंतुओं, वन्य जीवो पर असर पड़ेगा। बल्कि मनुष्य भी जल की एक बूंद बूंद के लिए लालायित हो सकता है।

क्योंकि जब जलस्तर में कमी आती रहेगी तो फिर एक दिन ऐसा भी आएगा। जब जल का एक इंसान तक पहुंचना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा और ऐसे में प्राणी जगत में हाहाकार मच सकता है। और विश्व के अनेक विकसित देश इस बात को भलीभांति पहले ही समझ चुके थे। इसलिए वर्ष 1992 से पूरे विश्व में 22 मार्च को जल दिवस के रुप में मनाया जाता है।

इस दिन दुनिया के बड़े-बड़े देशों एवं संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा लोगों को जल बचाने के लिए जागरूक होने का संदेश दिया जाता है।ताकि विश्व में हो रही इस जल संकट की समस्या से लड़ा जा सके। हालांकि जल की कमी से उभरना इतना आसान नहीं है, परंतु हां हम अपने दैनिक जीवन में कुछ छोटे-छोटे कार्यों को करें तो जरूर जल की बर्बादी होने से रोक सकते हैं, और जल की कमी को नियंत्रित कर सकते हैं।

माता-पिता, अभिभावकों को अपने बच्चों को बचपन से ही जल की महत्वता बताते हुए उन्हें जल का सही उपयोग एवं जल की बर्बादी न करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। स्कूल कॉलेज जैसे अन्य शिक्षण संस्थानों पर जल बचाने को लेकर नियमित अंतराल पर लोगों को जागरुक करना चाहिए। ताकि जल बचाने को लेकर उनकी आंख, कान खुले रह सके।

एक जिम्मेदार व्यक्ति के नाते हमें अपने परिवार में अपने दोस्तों रिश्तेदारों को जल के बचाव को लेकर इसकी कमी से होने वाले नुकसान के बारे में उन्हें सचेत करना हमारा कर्तव्य बनता है। इसके अलावा टंकी का ओवरफ्लो ना होना। नल को खुला ना छोड़ना। नहाते वक्त सावर की जगह बाल्टी का प्रयोग करना। बेवजह बिजली खुली नहीं छोड़ना। जैसे छोटे-छोटे कार्य करके भी जल के संरक्षण में अपना योगदान दिया जा सकता है।

अर्थात हम यदि मिलकर जल बचाने में अपना योगदान दें, तो निकट भविष्य में खड़े होने वाले इस जल संकट से मुक्ति पाने में कामयाब हो सकते हैं।

धन्यवाद!

भाषण 3 (Short Speech On Save Water In Hindi)

आदरणीय महोदय, अध्यापक एवं अध्यापिका एवं मेरे प्रिय छात्रों सुप्रभात।। आज मैं यहां जल की महत्वता को लेकर जल बचाओ पर भाषण लेकर आपके सामने मौजूद हूं। हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते कि जल के बिना हमारा जीवन कैसा होगा। क्योंकि गला सूखने पर जब मनुष्य को प्यास लगती है तो जल की अहमियत उसको याद आ जाती है।

जैसे ही प्यास बुझती है मनुष्य शायद यह भूल जाता है कि जल इस पृथ्वी में सीमित मात्रा में मौजूद है। अतः इसका उपयोग सोच समझकर हमें करना चाहिए परंतु इस बात की परवाह के बगैर मनुष्यों द्वारा जल का दोहन किया जाता है। सालों से जल की बर्बादी और इसके सही उपयोग को लेकर लोगों में जागरूकता ना होने की वजह से आज हम ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं जहां जल बचाना आज मनुष्य के लिए मजबूरी हो चुका है अन्यथा हमारे जीवन में जल संकट आ जाएगा।

और जल संकट उत्पन्न होने से मनुष्य पानी की बूंद बूंद के लिए तरसेगा। एक दूसरे से युद्ध करेगा और हरी-भरी पृथ्वी बंजर हो जाएगी जीव जंतु भी अपना दम तोड़ देंगे तो ऐसे असामान्य परिवर्तन हमें अपने वातावरण से देखने को न मिलें। जरूरी है कि हम सभी मिलकर जल बचाने को लेकर कदम उठाएं सरकार द्वारा जल बनाने को लेकर शुरू की गई नीतियों का पालन करें। ताकि विश्व में हो रही जल की कमी से निजात पाया जा सके।

विश्व में लगभग 1% पानी पीने योग्य है, और इस पर पूरी दुनिया आश्रित है। लेकिन हम यूं ही जल को बर्बाद करते रहे और इसके संरक्षण को लेकर कोई कदम नहीं उठाएंगे। तो हम पानी की बड़ी समस्या से जूझ जाएंगे और मनुष्य एवं पूरा प्राणी जगत खतरे में पड़ सकता है।

अतः इस प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण करना हमारी एक नैतिक जिम्मेदारी है। यह समझकर हमें आज से ही जल का संरक्षण करना चाहिए एवं समाज में जो लोग जल के प्रति आज भी जागरूक नहीं है उन्हें भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।


धन्यवाद!

तो दोस्तों आज इस पोस्ट में हमने आपको जल बचाओ पर भाषण (Save Water Speech In Hindi) के बारे में बताया है, और आपके साथ पानी बचाओ पर तीन speech share किए है, आपको जो भी अच्छा लगे आप उसको इस्तेमाल कर सकते हो।

उम्मीद है की आपको जल बचाओ पर भाषण (Save Water Speech In Hindi) का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।


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