65+ Slogan On Agriculture In Hindi [कृषि पर नारे]


65+ Slogan On Agriculture In Hindi [कृषि पर नारे]कृषि के अंतर्गत फसल का उत्पादन,फलों का उत्पादन, सब्जियों का उत्पादन तथा और एसे कार्य सम्मिलित रहते हैं जिनका उत्पादन हम पृथ्वी पर उगाकर कर सकते हैं तथा इसमें पशुधन,मत्स्य पालन, तथा कृषि व कृषि-वानिकी भी आते हैं।

देश में 1988 के समय लगभग 75% लोगों को सिर्फ कृषि क्षेत्र में ही रोजगार प्राप्त था। जो कि 2007 तक लगभग 52 परसेंट तक पहुंच गया। कृषि एक मुख्य गतिविधि होने के कारण भी विकसित राष्ट्रों की तुलना में हमारे देश में इसकी उत्पादकता बहुत कम है।

किसान की उन्नति है, देश की प्रगति। 

अन्न देकर जो हमारा पेट भरते, असल में वे भूखे पेट सोते। 

देश की उन्नति की तकदीर, किसानो की चमकदार तस्वीर। 

कृषि क्षेत्र हमारे जीवन यापन का सबसे मुख्य स्रोत है। समय के साथ कृषि क्षेत्र में जितना विकास हो रहा है, उसी विकास के कारण आज रोजगार के अवसर भी छिनता जा रहा है। भारत कृषि क्षेत्र सक्षम होने के बावजूद भी विश्व भर में दूसरा स्थान रखता है। 


65+ Slogan On Agriculture In Hindi [कृषि पर नारे]

Agriculture Slogan In Hindi [कृषि पर स्लोगन]

हमारा देश कृषि को प्रधानता देने वाला देश है, देश में कृषि कई वर्षों से की जा रही है, इसी कारण कृषि के क्षेत्र में हमारे देश की लगभग 60% जनता प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार करती है, जिसमें पशु पक्षियों से लेकर अनाज उत्पादन के सभी कार्य आते हैं और इसे ही Agriculture यानी कृषि कहते हैं।

2019 तक देश की GDP में कृषि की 16.5% आय की हिस्सेदारी रही। इस प्रकार एग्रीकल्चर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, हम किसी के बिना हमारे जीवन का कल्पना तक नहीं कर सकते। हमने Slogan On Agriculture In Hindi पर जितने भी स्लोगन लिखे है, वह कृषि पर स्लोगन है –

जब भी किसान दुखी रहेगा, नहीं कोई सुखी रहेगा।

जब किसान आगे बढ़ेगा, हिंदुस्तान तरक्की करेगा।

किसानो का मत करो अपमान, देश की है ये शान।

 किसान को न समझो गरीब, उज्जवल भविष्य है उनके करीब।

किसान की उन्नति है, देश की प्रगति। 

अन्न देकर जो हमारा पेट भरते, असल में वे भूखे पेट सोते।

Agriculture Slogan Hindi

देश की उन्नति की तकदीर, किसानो की चमकदार तस्वीर। 

किसान है अन्नदाता, यही है देश के भाग्यविधाता।

देश की प्रगति है तब तक अधूरी, किसान के विकास के बिना न होगी पूरी। 

ईमानदारी मेहनत जिसकी शान है, वह मेरे देश का किसान है।

किसान है अन्नदाता ख़ुशियों का है दाता।

आओ अब हम सम्मान करें किसानों को भी सलाम करें। 

किस्मत पर नहीं, परिश्रम पर विश्वास रखने वाला किसान ही है जीवन दाता। 

हर घर हो जाएगा खाली जब नहीं होगा अन्नदाता।

बंजर को भी जो उपजाऊ बना दे वही है हमारा किसान भ्राता।

किसान की उन्नति देश की प्रगति। 

नामुमकिन को जो मुमकिन बना दे खून भी पसीने की तरह बहा दे वही है अभिमानी किसान हमारा। 

उन्नति का आधार, किसान हमारा।

आत्मविश्वास की निशानी किसान अभिमानी।

जब होगा किसानों का सम्मान तब होगा देश खुशहाल। 

ऊंची है जिसकी शान, ईश्वर भी करता है जिसका गुणगान वही है मेरे देश का किसान।

किसान के घर में चाहे कुछ भी ना हो फिर भी उसके घर आने वाला भूखा नहीं जाता। 

जो बिन बरसात के अपनी आंखों के नीर से खेत को सींच दे उसे ही किसान कहते है।


देश का विकास, किसान के पास। 

देश की प्रगति की जो गति है वही है किसान। 

जो खुद तप कर फसल को पकाता है वही है मेरे देश का किसान। 

किसान है अन्नदाता यही है देश के सच्चे भाग्य विधाता। 

देश की हर समस्या का हल चलाकर हल निकालने वाला वही है मेरे देश का किसान

भाग्य के भरोसे नहीं कर्म के हौसलों पे जो आगे बढ़ता है वही है देश का किसान।

किसानों से ही है देश में जान इनके बिना देश है बेजान। 

किसान बिना दुनिया हो जाएगी भूख से परेशान।


मैं किसान हूं मुझे गर्व है किसान होने पर।

हिंदुस्तान की जान किसान की शान।

ईमानदारी और मेहनत की मिसाल हमारे देश का किसान। 

देश की जो तकदीर बदल दे ऐसा है मेरे भारत का किसान। 

दिल में बसती है जिसके भारत माता वही किसान है हमारे देश का भाग्य विधाता।

सच्चाई और मेहनत का पाठ पढ़ाने वाला

जय जय भारतीय किसान।

फसलों को लहरा दे खुशियों को घर घर पहुंचा दे

वहीं है हमारा किसान अन्नदाता। 

किसानों से है संपूर्ण प्रकृति का आहार

बिन किसान प्रकृति होगी निराश।

जिससे है जीवन का आहार वही किसान क्यों परेशान। 

किसानों से है देश का अभिमान किसान खेत में मरता है और किसान का बेटा फ़ौज में।

नेता देश में ऐश करता है और उसका बेटा विदेश मे।

जब भोजन की थाली सामने आ जाए।

तो भोजन के समय ईश्वर को नहीं उस महान किसान को धन्यवाद देना !!

घटाएँ उठती हैं बरसात होने लगती है

जब आँख भर के फ़लक को किसान देखता है।

किसान है देश के अन्नदाता।

यही है देश के भाग्यविधाता।

जिसने तुम्हे भुखा न रहने देने की जिम्मेदारी उठा रखी है।

किसान के लड़के ने अपने नाम के आगे डाक्टर जोड़ लिया

गाँव में हल ने कोने में पड़े-पड़े दम तोड़ दिया !!

ईमानदारी और मेहनत है जिसकी शान

वह है मेरे देश का किसान।

मत मारो गोलियो से मुझे मैं पहले से एक दुखी इंसान हूँ !!

मेरी नींद को दिक्कत ना भजन से ना अजान से है

मेरी नींद को दिक्कत पिटते हुवे जवान और खुदखुशी करते किसान से है !!

किसानों का सम्मान ही देश का सम्मान है।

मेरी मौत कि वजह यही हैं कि मैं पेशे से एक किसान हूँ !!

तापमान तो AC और कूलर वालो के लिए बढा है साहब !!

किसान की मदद देश विकास में योगदान।

ना कड़ी धुप की फ़िक्र है उसे ना घनघोर वर्षा की !!

भारत के भाग्यविधाता किसान आपके आयदाता।

अब तो बस चारो तरफ दिखते है होटलें और मकान ही मकान कहा से लाए खेत और खलिहाल क्या करेंगा अब मेरे देश का किसान!

सफल किसान है उन्नतशील किसान।

किसान का विकास देश की प्रगति, लेकिन वो भी उसके नसीब में नहीं है।

कृषि का इतिहास 

कृषि का इतिहास हजारों साल पुराना रहा है लगभग 105,000 पहले लोगों द्वारा कृषि कार्य प्रारंभ किए गए थे। तथा जंगलों में उपस्थित और उगने वाले विभिन्न अनाजों को लोगों द्वारा एकत्र करके उनका सेवन किया जाने लगा।

किसानों द्वारा जंगली अनाज का उपयोग लगभग 11500 साल पहले किया जाने लगा, उन्होंने इसे रोपने की कला भी सीखी और यही कला आज तक चल रही है।

आज से लगभग 10,000 साल पहले ही लोगों द्वारा भेड़, बकरी, बैल, भैंस आदि जानवरों को पालतू बनाया गया। और यही प्रथा लोगों द्वारा आज भी चलाई जा रही है आज भी लोग भिन्न प्रकार के जानवरों को पालते हैं और खुद का जीवन यापन करने में उनका सहयोग लेते हैं।

चीन में लगभग 6200 ईस्वी पूर्व से ही चावल का उत्पाद किया जाने लगा तथा साथ ही मूंग तथा सोया जैसी दालों का भी उत्पादन प्रारंभ हुआ। इस प्रकार प्रत्येक कार्य को सीखते सीखते आज समाज में कृषि से संबंधित प्रत्येक क्षेत्र का ज्ञान लोगों में समाहित है।

भारत में कृषि की विशेषताएं

वर्तमान समय में भारत जैसे विशाल देश में कृषि आजीविका का सबसे बड़ा स्रोत है यहीं से लाखों लोगों का व्यवसाय संबंध रखता है जिस कारण लोग दो वक्त की रोटी आराम से अपने परिवार के लिए कमा सकते हैं। वर्तमान समय में भारत में लगभग 65% लोग कृषि क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

मानसून पर निर्भरता – 

भारत में कृषि क्षेत्र लगभग आधे से ज्यादा मानसून पर निर्भर करता है। यदि मानसून वक्त पर अच्छा आता है तो भारत में कृषि अच्छी होती है। यदि मानसून सही वक्त पर सही मात्रा में नहीं आता है, तो भारत की कृषि सही रूप से विकसित नहीं हो पाती।

श्रम गहन खेती – 

भारत में दिन-प्रतिदिन जनसंख्या वृद्धि के कारण इस धरती पर दबाव बढ़ता जा रहा है जिस कारण, भूमि के विभाजन से इन पर मशीनों का उपयोग करना उचित नहीं रहता।

बेरोजगारी –

भारत के कृषि क्षेत्र में पर्याप्त उपकरणों तथा सिंचाई साधनों की व्यवस्था न होने के कारण किसान वर्ष के कुछ महीने ही इस कार्य में व्यस्त रहते हैं तथा साल के ज्यादातर महीनों में ये लोग बेरोजगारी सहन करते हैं,इसे छिपी बेरोजगारी भी कहते हैं।

जोत का छोटा आकार – 

हर पीढ़ी के खेतों का विभाजन होने के कारण इन जोतों का आकार घटता जा रहा है, जिस कारण पर्याप्त रूप से खेती करना आसान नहीं रहता।

उत्पादन के पारंपरिक तरीके –

भारत जैसे महान देश में खेती का पारंपरिक चलन चलता आ रहा है इस कारण इस में उपयोग किए जाने वाले साधन भी पारंपरिक रहते हैं जिनसे उन्नत खेती नहीं की जा सकती।

कम कृषि उत्पादन –

हमारे देश में कृषि उत्पादन अत्यंत कम होने के कारण यहां प्रति हेक्टेयर में मात्र 27 क्विंटल गेहूं का उत्पादन होता है ।जबकि फ्रांस में 71.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और ब्रिटेन में 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर इस कारण भारत में एक किसान की मजदूरी औसत मात्र 162 डालर रहती है जबकि नार्वे में 973 डालर,और अमेरिका में 2408 डॉलर है।

खाद्य फसलों का प्रभुत्व –

भारत में पिछड़ी कृषि के कारण गेहूं चावल और बाजरा जैसे खाद्य फसलों के उत्पादन के लिए मात्र 75% जमीन उपयोग में लाई जाती है जबकि 25% खेती वाणिज्य फसलों के लिए उपयोग की जाते है।

उम्मीद है की आपको 65+ Slogan On Agriculture In Hindi [कृषि पर नारे] से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी अच्छे से मिल चुकी होगी।


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