जन्माष्टमी पर भाषण – Speech On Janmashtami In Hindi

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दोस्तों अगर आप जन्माष्टमी पर भाषण तलाश रहे हो तो यह पोस्ट आपके लिए काफ़ी हेल्पफ़ुल हो सकती है, क्यूकी आज इस पोस्ट में हम कृष्ण जन्माष्टमी पर भाषण, Speech On Janmashtami, Janmashtami Speech In Hindi के बारे में जानिंगे।

जन्माष्टमी के पावन पर्व की पूरे देश भर में धूमधाम देखी जा सकती है भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन को प्रतिवर्ष भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक जन्माष्टमी न सिर्फ भारत में बल्कि भारत के अलावा विश्व के अन्य देशों में रहने वाले हिंदूओं द्वारा इस धार्मिक उत्सव को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।


यदि आपको भी जन्माष्टमी के इस पावन पर्व जन्माष्टमी पर्व के विषय पर बोलने का अवसर मिला है तो आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपके लिए Janmashtami speech in hindi लेकर आए हैं।

इन स्पीच को पढ़कर आप अपने लिए एक शानदार स्पीच तैयार कर पाएंगे। तो आइए आज के इस आर्टिकल की शुरुआत करते हैं।

जन्माष्टमी पर भाषण – Speech On Janmashtami In Hindi

भाषण 1 (Long Speech On Janmashtami In Hindi)

कृष्ण ही गुरु हैं, कृष्ण ही सका है वही भगवान हैं उन्हें जानना एवं उनकी भक्ति में रत रहना ही भक्तों का कार्य है!

साथियों सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक जन्माष्टमी का पर्व प्रतिवर्ष भगवान कृष्ण के इस दिन पृथ्वी पर अवतरित होने की वजह से उनके जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष तिथि का दिन जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी के पर्व को विभिन्न राज्यों में कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी ,श्री कृष्ण जयंती इत्यादि अन्य नामों से भी इस पावन पर्व को मनाया जाता है।

युगों युगों से भगवान श्री कृष्ण लोगों के दिलों में बसे हुए हैं प्रत्येक बच्चे बच्चे से लेकर एक बुजुर्ग उनकी महिमा से भलीभांति परिचित हैं। इसलिए न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी उनके अनेक भक्त हैं। बचपन से ही हम उनसे जुड़ी अनेक प्रसिद्ध कथाएं एवं गाथाओं को पढ़ते एवं सुनते आ रहे है।

और इन्हीं यादों को और भगवान कृष्ण की बातों को याद करते हुए सदियों से हम जन्माष्टमी के इस त्यौहार को धूमधाम से मनाते आ रहे हैं। इस पर्व को भारत के अलावा विश्व के अन्य देश नेपाल अमेरिका इंडोनेशिया बांग्लादेश जहां हिंदू धर्म के लोग निवास करते हैं वहां पर भी इसे सेलिब्रेट किया जाता है।

इस दिन भगवान कृष्ण के प्रति असीम आस्था रखने वाले लोग उपवास (व्रत) जरूर रखते हैं। लोगों द्वारा अपने घर के मंदिरों की साफ सफाई कर रंग बिरंगी लाइटों से उसे सजाया जाता है।भगवान कृष्ण की प्रतिमा का पालन किया जाता है एवं इस दिन पूरे दिन भगवान कृष्ण की भक्ति में आस पड़ोस के लोग सब मिलकर सामूहिक रूप से भगवान कृष्ण के भजन कीर्तन करते हैं।

इस दिन मंदिरों में झांकियां लगाकर भगवान कृष्ण को झूले पर सुलाया जाता है। मंदिरों को सजाने का कार्यक्रम चार-पांच दिन पहले से ही शुरू हो जाता है। और जन्माष्टमी के पर्व के दिन रंग बिरंगी लाइटों के साथ दिखने वाला नजारा, और भगवान कृष्ण की भक्ति के मधुर गीतों को सुनकर भक्ति में दिल प्रसन्न हो जाता है।

इस दिन भगवान कृष्ण को फलों जैसे सात्विक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है एवं रात्रि में 12:00 बजे पूजा अर्चना की जाती है। एवं उसके बाद लोग अपना उपवास तोड़कर भोजन ग्रहण करते हैं।

इस भव्य उत्सव को मनाने के लिए विभिन्न प्रकार के समारोह का आयोजन होता है।साथ-साथ भारत के विभिन्न राज्यों में भगवान कृष्ण के भक्तों द्वारा द्वारा एक प्रसिद्ध दहीहंडी कार्यक्रम आयोजित किया जाता है जिसे देखने हेतु बड़ी संख्या में लोग रात्रि के 12:00 बजे उपस्थित रहते हैं कई स्थानों पर दही हांडी फोड़ने वाले व्यक्तियों को इनाम भी दिया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण विष्णु के आठवें अवतार हैं जिन्होंने इस पृथ्वी पर अवतार अपने भक्तों की रक्षा हेतु लिया था उनके कोमल हाथों में बांसुरी सिर पर मोर के पंख विराजमान होते है! बालपन में ही अपनी अनेक महान कार्यों एवं रासलीला से  कृष्ण काफी प्रसिद्ध हुए।

और कृष्ण की इन्हीं लीलाओं को जन्माष्टमी के पर्व के दिन भक्तों द्वारा पुस्तकों ,टेलीविजन पर देखा जाता है एवं उनकी अद्भुत लीलाओं के लिए उन्हें याद कर प्रणाम किया जाता है

माना जाता है इस दिन जो भक्त पूर्ण विश्वास के साथ भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं।उनकी मनोकामना कृष्ण भगवान अवश्य पूर्ण करते हैं। विशेषकर नवी विवाहित महिलाएं यदि पूरे तन मन धन से इस दिन व्रत रखकर भगवान कृष्ण की भक्ति करती हैं तो उन्हें जल्द ही एक शिशु प्राप्त होता है।

इसके अलावा अविवाहित महिलाएं इस दिन अपने भविष्य में एक अच्छा वर प्राप्त करने हेतु  भगवान कृष्ण से आशीर्वाद की कामना करती है। धरती पर भगवान कृष्ण ने पापियों का संहार करने एवं अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए जन्म लिया। आज से लगभग 5,000 वर्ष पूर्व की बात है मथुरा नामक नगरी में एक कंस नामक क्रूर राजा रहता था पूरी प्रजा उसके अत्याचारों से दुखी थी। 

रिश्ते में कंस भगवान श्री कृष्ण का मामा था ।परंतु कंस जैसे पापी लोगों का नाश करने के लिए भगवान कृष्ण ने भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की तिथि कि गहरी अंधेरी रात में धरती पर अवतार लिया। भगवान कृष्ण के जन्म होने से पूर्व ही कृष्ण को यह सूचना मिल चुकी थी कि उसकी बहन से होने वाला आठवां पुत्र उसके वध करेगा! जिस वजह से कंस ने अपनी बहन देवकी एवं कृष्ण के पिता वासुदेव को कारागार में डाल दिया था।

अपनी मौत के डर से कंस ने एक-एक कर देवकी के सभी सातों बालकों को पैदा होते ही मार दिया लेकिन देवकी के आंठवे पुत्र के तौर पर भगवान कृष्ण के पैदा होने के दिन ही कारागार के द्वार स्वतः खुल गए और उनके पिता वासुदेव ने इस मौके का फायदा लेते हुए कृष्ण भगवा को अपने मित्र नंद के यहां छोड़ दिया।

जैसे ही कंस को यह आभास हुआ कि देवकी का आठवां पुत्र इस पृथ्वी पर अब जन्म ले चुका है ,तो उसने भगवान कृष्ण को मारने के अनेक प्रयास किए लेकिन वह इन सभी प्रयासों में असफल रहा और समय आने पर भगवान कृष्ण ने उसका वध कर उसे उसके किए गए कर्मों का दंड दिया।

इस धरती पर भगवान कृष्ण द्वारा निर्दोषों की रक्षा हेतु अवतार लिया गया था। अतः अनेक मौकों पर उन्होंने अपने भक्तों को संकट से उबारा। भगवान एक सामान्य पुरुष नहीं थे बल्कि वे सर्वशक्तिमान थे इसलिए बाल काल से ही उन्होंने ऐसे अद्भुत कार्य किए जिनके बारे में एक सामान्य व्यक्ति सोच भी नहीं सकता।

फिर चाहे वह बात हो उस गोवर्धनपर्वत को एक उंगली में उठाने की या फिर कालिया नाग का वध करके उसके घमंड को चुर करने की। अपने महान कार्यों, लीलाओं की वजह से कृष्ण कन्हैया सदा यूं ही भक्तों के दिल में बसे रहेंगे।

भाषण 2 (Medium Speech On Janmashtami In Hindi)

हिंदुओं के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है जन्माष्टमी का पर्व जिसे भारतवर्ष में भगवान श्री कृष्ण के अवतार दिवस के रुप में मनाया जाता है। भगवान श्री कृष्ण के भक्तों के लिए यह एक पावन पर्व होता है जिस दिन वह भगवान श्री कृष्ण की आस्था में लीन रह कर उन्हें दिल से याद कर प्रसन्न करने का प्रयास करते है।

भगवान श्री कृष्ण को विष्णु भगवान का अवतार माना गया है। जिन्होंने इस पृथ्वी पर मामा कंस नामक अत्याचारी राक्षस का अंत करने के लिए आज से हजारों वर्ष पूर्व इस पृथ्वी पर जन्म लिया। उस समय मथुरा नगरी कंस के अत्याचारों से बेहद दुखी थी। स्वयं कंस ने अपनी मौत के डर से अपनी बहन देवकी को कारागार में डाल दिया।

जिस दिन देवकी और वासुदेव का विवाह हुआ उसी दिन कंस रथ पर देवकी और वसुदेव को छोड़ने जा रहा था। तो उसी दौरान एक आकाश से भविष्यवाणी होती है कि तेरे अत्याचारों का अंत देवकी का आठवां पुत्र करेगा। मौत के भय से हर समय कंस सदा अफसोस में रहता! इसलिए देवकी से होने वाले एक के बाद एक 7 संतानों को उनसे पैसा होते ही खत्म कर दिया।

तत्पश्चात देवकी से भगवान कृष्ण ने आठवें पुत्र के रूप में कारागार में ही जन्म लिया। जन्म की रात्रि में चारों तरफ अंधकार फैला था, तेज हवाएं चलने लगी और प्रभु की लीला से कारागार के कपाट स्वयं खुल गए। कृष्ण के पिता वसुदेव अपने आंठवे पुत्र को सुरक्षित रखने के लिए अपने दोस्त नंद के घर रात में ही उफनती नदी को पार कर गोकुल में रख आए। वहां नंद यशोदा ने कृष्ण का लालन-पालन किया

क्योंकि कृष्ण कोई सामान्य प्राणी नहीं थे अतः बचपन से ही उनकी लीलाएं अद्भुत थी उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली से उठाकर इंद्र का घमंड चूर चूर कर दिया और कालिया नाग का वध किया। इस दौरान कंस ने अपने आठवें भांजे को मारने की अनेक कोशिशें की परंतु भगवान ने स्वयं कंस के काल के रूप में इस धरती पर अवतार लिया था। अतः समय आने पर कंस का वध करके उन्होंने कंस के अत्याचारों से मथुरा नगरी को मुक्ति दिलाई।

महाभारत में भी कृष्ण भगवान का वर्णन हमें सुनने को मिलता है जहां उन्होंने पांडवों को उनका सम्मान एवं  राजपाट वापस दिलाकर कौरवों को उनके कर्मों की सजा दी।

युगों युगों से भगवान कृष्ण करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक रहे हैं। अतः हर साल जन्माष्टमी का पर्व पूरे भारतवर्ष समेत विश्व के अन्य देशों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।भगवान कृष्ण का आशीर्वाद हम सब पर यूं ही बना रहे इसी कामना के साथ में इस भाषण को विराम देता हूं।

भाषण 3 (Short Speech On Janmashtami In Hindi)

युगो युगो से आज जन्माष्टमी के पर्व को बड़ी धूम धाम से मनाकर उनके भक्तों द्वारा उन्हें याद किया जाता है। यहां उपस्थित सभी लोगों को जय श्री कृष्णा।आज मैं यहां आपके समक्ष इस पावन पर्व के मौके पर प्रभु श्री कृष्ण के विषय पर एक लघु speech सुनाने जा रहा हू।

वर्ष भर में कुछ ऐसे पावन पर्व होते हैं जो भक्त गणों की धार्मिक आस्था प्रकट करते हैं और ऐसा ही एक विशेष दिन है भक्तों के लिए जन्माष्टमी का। प्रतिवर्ष भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के अवसर पर जन्माष्टमी पर्व भारत समेत विश्व के अनेक देशों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए यह दिन जीवन के विशेष दिनों में से एक होता है इस दिन पूरे भारत में कृष्ण भगवान की भक्ति और उनका गुणगान होता है। मान्यता है कि आज से लगभग 52,000 वर्ष पूर्व इस पृथ्वी पर भगवान कृष्ण अवतरित हुए थे! उन्हें विष्णु भगवान के सबसे शक्तिशाली मानव  अवतारों में से एक माना जाता है।

उनके अवतार का कारण इस पृथ्वी पर निर्दोषों और मासूमों के प्रति हो रहे अत्याचार एवं पापों को मिटाना है। गीता में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कहा भी है कि “जब जब इस पृथ्वी पर पाप बढ़ते हैं तो उन पापों को नष्ट करने के लिए मैं इस पृथ्वी पर तब तब मैं जन्म लेता हूं”

बाल्यवस्था से लेकर अपने जीवन काल के दौरान उन्होंने अनेक ऐसे महान कार्य किए जिनसे स्वयं बड़े-बड़े देवता गणों ने भगवान कृष्ण का सम्मान किया। जैसे वृंदावन पर्वत को एक कनिष्ठ उंगली से उठाकर इंद्र के घमंड को चूर चूर करना, मथुरा नगरी में कंस का वध कर उसके अत्याचारों से प्रजा को मुक्त करना ,कालिया नाग का वध करना जैसी अनेक कहानियां।


इसलिए आज भी टेलीविजन पुस्तकों के माध्यम से उनकी गाथाओं को सुनकर उनकी याद को भक्तगण दिल में संझों कर रखते है। महाभारत मैं भी पांडवों के प्रति कौरवों द्वारा किए जाने वाले अन्याय से भी मुक्ति दिलाकर उन्हें वापस राज्य पाठ सम्मान देने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। वे अर्जुन के सारथी के तौर पर अर्जुन को ज्ञान देते रहे यह ज्ञान हमें गीता पुस्तक में विस्तार से मिलता है।

गीता नामक इस दिव्य पुस्तक में मानव जीवन के दुखों एवं उनके कारणों एवं उससे निवारण का विस्तार से उल्लेख किया गया है। भगवान कृष्ण ने देवकी माता के आठवें पुत्र के रूप में एक कारागार में इस प्रथ्वी में जन्म लिया था। जन्म के पश्चात ही रात्रि में उनके पिता वसुदेव उन्हें उनके मित्र नंद के यहां गोकुल में छोड़ जाए ताकि कंस नामक अत्याचारी उन्हें नुकसान न पहुंचा सके।

अतः बचपन से ही कृष्ण गोकुल में पले बढ़े वहां मां यशोदा ने उनका पालन पोषण किया और आगे चलकर उन्होंने अपने अत्याचारी मामा कंस का वध किया। जन्माष्टमी के इस पर्व को अर्ध रात्रि में मनाने के पीछे एक यह भी वजह है कि भगवान कृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध करने के लिए अंधेरा, तूफानी और तेज़ हवा में जन्म लिया।

अतः पूरे भारत में जन्माष्टमी का यह पर्व पूरी श्रद्धा एवम् हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ।इस अवसर पर कृष्ण भक्ति के गीतों की गूंज, मटकी फोड़ आयोजन, पूजा आरती नृत्य का माहौल चारों ओर बना रहता है।

उम्मीद है की अब आपको जन्माष्टमी से जुड़ी पूरी जानकारी मिल चुकी होंगी, और आप कृष्ण जन्माष्टमी पर भाषण, Speech On Janmashtami, Janmashtami Speech In Hindi के बारे में काफ़ी कुछ जान गये होंगे।


उम्मीद है की आपको जन्माष्टमी पर भाषण – Speech On Janmashtami In Hindi! का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।


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