महिला सशक्तिकरण पर भाषण (Women Empowerment Speech in Hindi)

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दोस्तों अगर आप महिला सशक्तिकरण या Women Empowerment पर भाषण तलाश रहे हो तो आजका यह पोस्ट आपके लिए काफ़ी हेल्पफ़ुल हो सकता है। क्यूकी आजके इस पोस्ट में हम जानिंगे women empowerment in hindi, speech on nari shakti in hindi, mahila sashaktikaran par bhashan, महिला सशक्तिकरण पर भाषण (Women Empowerment Speech in Hindi) के बारे में।

महिलाएं किसी भी राष्ट्र की आधारशिला होती हैं जो उस राष्ट्र को विकसित एवं महान बनने के लिए उत्तरदाई होती है। इसलिए उनकी उन्नति के बगैर समाज की उन्नति की कल्पना भी नहीं की जा सकती. एक महिला जो किसी की मां, किसी की बेटी, किसी की पत्नी होती है, वह भी पुरुषों के समान ही समाज में विशेष स्थान की हकदार हैं।

इसलिए जो कोई राष्ट्र उन्नति करना चाहता है, उस राज्य में महिलाओं को पुरुषों की भांति ही समान अवसर और सभी अधिकार मिलने चाहिए। आज हम यहां इस लेख के माध्यम से आपको महिला सशक्तिकरण के महत्व और इसकी आवश्यकता को स्पीच के माध्यम से पहुंचाने का प्रयास करेंगे। और देखिंगे कुछ Best Women Empowerment Speech in Hindi!

अगर आपको किसी सार्वजनिक मंच से या किसी समारोह में महिला सशक्तिकरण के विषय पर बोलने का अवसर दिया गया है, तो नीचे दिए गए भाषणों में से किसी का भी आप अपनी आवश्यकता के अनुरूप चयन कर सकते हैं।

महिला सशक्तिकरण पर भाषण (Women Empowerment Speech in Hindi)

महिला सशक्तिकरण पर भाषण (Women Empowerment Speech in Hindi)

भाषण 1 (Long Speech On Women Empowerment In Hindi)

सभी महानुभावों, यहां उपस्थित अतिथिगणों को मेरी तरफ से नमस्कार, मेरा नाम मोहित नेगी है, आज इस विशेष मौके पर आपके समक्ष मुझे महिला सशक्तिकरण पर अपने विचारों को रखने का मौका दिया गया है जिसके लिए मैं आयोजकों और महानुभावों का धन्यवाद करना चाहूंगा।

सदियों से महिलाएं एक आधारशिला के रूप में देश को आगे बढ़ाने में अहम भागीदारी निभा रही हैं। लेकिन पुरुष और महिलाओं के बीच का भेद पूरी तरह आज भी खत्म नहीं हुआ है। वर्ष 1950 में देश का संविधान लागू किया गया तो इस मानसिकता के साथ संविधान में वे नियम कानून जोड़े गए जिससे जाति, लिंग के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव पुरुष या महिला के बीच ना हो परंतु जमीनी हकीकत को देखें तो आजादी के 70 से भी अधिक वर्षों बाद महिलाओं की स्थिति पहले से काफी बेहतर हुई है।

आज महिलाएं राजनीति, खेल, मीडिया, शिक्षा विज्ञान  इत्यादि हर क्षेत्र में कार्य कर पुरुषों के समान ही देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अक्सर समाचारपत्रों, टेलीविजन पर खेलकूद हो या अन्य कोई क्षेत्र महिलाओं के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के कारण देश के नाम रोशन होने की खबरें आती रहती हैं। लेकिन हकीकत उस किताब के पन्ने की तरह दिखती है जो एक तरफ से तो पूरा लिखा हुआ है और दूसरी तरफ से बिल्कुल कोरा अर्थात एक तरफ शहरी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के जीवन स्तर बेहतर हुआ है इसमें कोई दो राय नहीं.

लेकिन आज भी देश की बेटी, स्त्रियां जो गांव में निवास करती हैं, उन्हें समाज की रूढ़िवादी मानसिकता की वजह से आगे बढ़ने में मुश्किलें आ रही है। शहरी महिलाओं की तुलना में उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिल पाते,  इसके पीछे भले अनेक कारण हो सकते हैं जैसे आर्थिक स्थिति सही ना होना? महिला साक्षरता को महत्वपूर्ण न समझना इत्यादि।।

परंतु कोई भी देश तब तक महान या विकसित नहीं हो सकता जब तक महिलाएं देश के विकास में अपना योगदान ना दें। इसलिए यह कहना बिल्कुल भी अनुचित नहीं होगा कि बिना नारी सशक्तीकरण के मानव का विकास अधूरा है। अतः महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों में कमी लाना, समाज में लड़कों के समान ही लड़कियों के पैदा होने पर गर्व कर उन्हें शिक्षा, खेलकूद इत्यादि के क्षेत्र में वह हक देना जिनके वे हकदार हैं।

हमें पुरुष और नारी के बीच का यह अंतर खत्म करना होगा जो महिलाओं और देश के विकास के लिए बाधा है। महिला सशक्तिकरण के माध्यम से हम महिलाओं को सशक्त कर उन्हें आगे बढ़ने और जीवन को बेहतर तरीके से जीने में उनकी मदद कर सकते हैं। इसकी शुरुआत घर से ही जा सकती है घर में महिलाओं, बेटियों को जीवन में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास देकर, उन्हें अपने फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता देकर उनके द्वारा लिए गए अहम फैसलों पर उनका सपोर्ट कर नारी सशक्तिकरण शब्द को अमल में लाया जा सकता है।

जब भी बात होती है महिला सशक्तिकरण की तो इस संदर्भ में महिलाओं की शिक्षा पर विशेष ध्यान रखना जरूरी है आजादी के बाद की तुलना वर्तमान समय से की जाए तो महिलाओं की साक्षरता दर में वृद्धि हुई है। हालांकि स्कूली पढ़ाई पूरी होने के पश्चात अपनी पढ़ाई जारी रखने वाली बेटियों की संख्या में कमी आती चली जाती है। क्योंकि कई परिवार आज भी कम उम्र में ही बेटियों को शादी करने के लिए विवश कर देते हैं। परंतु हमें चाहिए एक बेटे के समान ही बेटी को भी पढ़ने के समान मौका दिया जाए क्योंकि महात्मा गांधी कहते हैं जब आप किसी एक लड़की को शिक्षित करते हैं तो उससे एक नहीं बल्कि 2 परिवार शिक्षित होते हैं।

महिलाओं के शिक्षित होने से, अपने जीवन में आगे बढ़ने खुद का विकास कर समाज के विकास में योगदान देने में सहायता मिलती हैं। महिलाओं को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए। ताकि वे सार्वजनिक मंच से अपने विचारों को लोगों तक पहुंचा सके! कई महिलाएं आत्मविश्वास की कमी के चलते भी जीवन में वह करने की कोशिश नहीं करती जिसके वह काबिल है।

महिला सशक्तिकरण की जब बात होती है तो महिलाओं की सुरक्षा को कदापि नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज भी बड़ी संख्या में रोजाना महिलाओं पर होने वाले अत्याचार जैसे मारपीट, भ्रूण हत्या, शादी के लिए दहेज, घरेलू हिंसा की खबरें लगातार खबरें हेड लाइन के रूप में दिखाई देती हैं।।

जब तक सरकार द्वारा बनाए गए महिला सुरक्षा को लेकर कड़े नियमों का पालन लोग नहीं करते, तब तक नारी सशक्तिकरण की बातें करना वयर्थ है। संक्षेप में कहा जाए तो जब तक पुरुषों के समान ही महिलाओं को जीवन जीने के अवसर प्राप्त नहीं होते! तब तक महिलायें देश के विकास में अपना शत प्रतिशत योगदान नहीं दे सकती। इसी उम्मीद के साथ की हम महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देंगे ताकि महिलाओं को वह सम्मान मिल सके जिसके वे योग्य हैं। अब महिला सशक्तिकरण पर अपने इस भाषण का मैं यहीं विराम देना चाहूंगा।

भाषण 2 (Medium Speech On Women Empowerment In Hindi)

आप सभी को मेरी तरफ से आदरपूर्वक नमस्कार, आज हम सभी यहां इस खास मौके पर आयोजित किए गए कार्यक्रमों को देखने के लिए उपस्थित हैं। इस अवसर पर मुझे महिला सशक्तिकरण जैसे सामाजिक मुद्दे पर अपने विचारों को रखने का मौका दिया गया है जिसके लिए मैं आयोजकों और कमेटी का दिल से धन्यवाद करूंगा। किसी महापुरुष ने क्या खूब कहा था कि कोई भी देश तब तक सफलता के शिखर तक नहीं पहुंच सकता, जब तक उस देश की महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर ना चलें

और इस कथन का बेहतरीन उदाहरण दुनिया के वे विकसित देश हैं, जहां महिलाएं पुरुषों के समान ही जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। भारत के संदर्भ में बात की जाए तो हमारे देश में भी आज महिलाएं राजनीति, खेल, विज्ञान हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का लोहा मनवा रही है और यह साबित कर चुकी है कि महिलाएं भी किसी से कम नहीं।

पर आज भी पुरुषों के समान महिलाओं को मिलने वाले मौके काफी कम है, देश के उच्च शहरों में महिलाओं के लिए आगे बढ़ने के अनेक अवसर दिखाई देते हैं! पर आज भी जनसंख्या का एक बड़ा भाग गांव में निवास करता है और वहां महिलाओं की स्थिति में कुछ खास परिवर्तन नहीं आया है. आज भी उन्हें समाज की रूढ़िवादी और पिछड़ी मानसिकता की वजह से अपने सपनों को पूरा करने के लिए वह अवसर तथा सपोर्ट नहीं मिल पाता जिनकी वह हकदार हैं।

देश को विकास की राह पर ले जाने के लिए हमें चाहिए कि देश की बेटियों, महिलाओं में आत्मविश्वास जगाकर उन्हें वे अधिकार, सुविधाएं दें जिनके वह काबिल है, जिससे उन्हें जीवन में आगे बढ़ने और कुछ बेहतर कर दिखाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। लेकिन देश का दुर्भाग्य यह है कि एक तरफ हम महिलाओं के अधिकारों, नारी सशक्तिकरण की बात करते हैं वहीं दूसरी तरफ महिलाओं पर होने वाले अत्याचार, घरेलू हिंसा, रेप जैसी वारदातों का आंकड़ा हर साल बढ़ता ही रहता है.

देश की बेटियां जो कुछ जीवन में बड़ा करना चाहती हैं, आगे इसलिए नहीं बढ़ पाती क्योंकि समाज में घटिया सोच के लोग उन्हें दबाने का भरपूर प्रयास करते हैं। जब तक स्थिति यूं ही बनी रहेगी महिलाओं को एक स्वतंत्र देश में रहने के बावजूद भी अपने जीवन में स्वतंत्रता पूर्वक जीने के लिए संघर्ष करते रहना होगा तो देश आगे बढ़ने के लिए संघर्ष करता रहेगा। महिलाओं को समाज की आधारशिला कहा जाता है वह किसी की बेटी,पत्नी व मां होती है उन्हें एक पुरुष के समान ही अपने विचारों को रखने जीवन में अपने फैसले खुद लेने और शिक्षा हासिल करने का पूरा अधिकार होना चाहिए।

क्योंकि यह कदापि उचित तो नहीं कहा जा सकता कि पुरुष की भांति महिला को अपने मुताबिक जीने का अधिकार सिर्फ इसलिए नहीं दिया जाए क्योंकि वह एक महिला है? जब तक इस तरह की घटिया सोच समाप्त नहीं होगी तब तक महिलाएं अपने अधिकारों के लिए लड़ती रहेंगी। जरूरी है समय रहते हम अपनी सोच में बदलाव कर महिलाओं को भी स्वतंत्रतापूर्वक जीने का अधिकार देकर समाज में उन्हें वह स्थान दें जिसके वह हकदार हैं।

भाषण 3 (Short Speech On Women Empowerment In Hindi)

इस मंच से आप सभी को मेरा नमस्कार हर साल की तरह आज महिला दिवस के मौके पर हम उपस्थित हैं, महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर अपने विचारों को आपके समक्ष रखने के लिए। यह देखना बेहद कष्टदाई है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में रहने वाली महिलाएं को जब संविधान ने सामाजिक,आर्थिक, राजनीतिक तौर पर सभी अधिकार दिए हैं तो फिर भी उन्हें आखिर अपने अधिकारों के लिए क्यों लड़ना पड़ता है?

आखिर आज भी क्यों महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कमजोर माना जाता है। देश की आजादी के पश्चात जब संविधान का निर्माण किया गया तो संविधान में नियम कानूनों को बिना लिंग भेद के बनाया गया ताकि प्रत्येक मनुष्य सरलता जीवन जी सके! लेकिन यदि सोचा जाए क्या वह आजादी है जिसमें महिलाओं को अपने जीवन में आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता? अपने विचार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं होती, और ना ही अपने कैरियर को चुनने और उसमें आगे बढ़ने की आजादी मिलती है

मुझे पूरी उम्मीद है आपका जवाब भी नहीं होगा, इसीलिए आज महिलाओं को सशक्त करना अत्यंत जरूरी हो चुका है। क्योंकि एक तरफ बात होती है देश के विकास की देश को महान बनाने की और दूसरी तरफ आज भी महिलाओं को पुरुषों द्वारा दबाया जाता है। एक महापुरुष ने कहा था कि महिलाओं की उन्नति में ही राष्ट्र की उन्नति निर्भर है। और जब तक किसी देश में पुरुषों के समान ही महिलाओं को प्राथमिकता नहीं दी जाती उस देश का आगे बढ़ना अत्यंत कठिन है।

क्योंकि देश को चलाने के लिए पुरुषों के समान ही महिलाओं का भी योगदान अत्यंत जरूरी हैं,!लेकिन प्रायः यह सोच लिया जाता है कि अगर कोई लड़की है तो वह चूल्हा ही संभालेगी वह ज्यादा पढ़ नहीं सकती.. यह बात भले ही आज के आधुनिक समाज में  कई लोगों को सही नहीं लगती! क्योंकि शहरी जीवन में आज महिलाएं जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में पुरुषों की तरह ही आगे बढ़ रही है, और नाम ऊंचा कर रही हैं। परंतु हमारे देश की अधिकतर आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में ही निवास करती है।

जहां आज भी बेटियों कि शिक्षा, उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा उन्हें जीवन जीने के वह समान अवसर नहीं मिल पाते जिनकी वह हकदार हैं। अतः जरूरी है सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों की ओर अधिक ध्यान देना। जहां आज भी महिलाएं लोगों की रूढ़िवादी सोच के कारण आगे नहीं बढ़ पाती। महिलाओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का कार्य न सिर्फ देश की सरकार का है। बल्कि देश के सभी पुरुषों की भी यह जिम्मेदारी है महिलाओं का सम्मान करें, महिलाओं की आवाज दबाने के बजाय उनका आत्मविश्वास बनाए।

उन्हें जीवन में कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित करें तभी यह महिला दिवस मनाने का औचित्य पूरा होगा। क्योंकि जिस राष्ट्र में नारी का सम्मान होता है, वही राष्ट्र में महान कहलाता है। इन्हीं विचारों के साथ मै अपने इस लघु भाषण को विराम देना चाहूंगा धन्यवाद।

तो दोस्तों आशा करते हैं की अब आपको women empowerment in hindi, speech on nari shakti in hindi, mahila sashaktikaran par bhashan, महिला सशक्तिकरण पर भाषण (Women Empowerment Speech in Hindi) से जुड़ी पूरी जानकारी मिल चुकी होगी।

उम्मीद है की आपको महिला सशक्तिकरण पर भाषण (Women Empowerment Speech in Hindi) का यह पोस्ट पसंद आया होगा, और हेल्पफ़ुल लगा होगा।

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